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Womens day special: इमोशंस को आवाज देती भावना

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जगजीत सिंह-चित्रा सिंह की गाई एक चर्चित गजल है, अपनी आग को जिंदा रखना कितना मुश्किल है, पत्थर बीच आइना रखना कितना मुश्किल है। हममें से ज्यादातर लोगों ने सुनी होगी लेकिन इस गजल के बोलों की तर्ज पर हकीकत में जिंदगी जी रही हैं भोपाल की एक महिला फोटोग्राफर भावना जायसवाल। कैमरा हाथ में होता है तो भावना एक अलग ही दुनिया के दीदार कराती हैं। उनके लेंस का दायरा इतना व्यापक है कि उसमें जिंदगी के अलहदा और चटख रंग कुलांचे भरते हैं। देखने वाला भावना के कैमरे के कैनवास में कभी अटखेलियां करता है तो कभी भावना के कैमरे के साथ उदास और बेजार महसूस करने लगता है।Bhavna Jaiswal_Pozitive India पुरुषों की मिल्कियत समझी जाने वाली फोटोग्राफी को जुनून की हद तक मोहब्बत करने वाली भावना को फोटोग्राफी का हुनर विरासत में मिला। उनके पिता नवल जायसवाल मध्यप्रदेश के नामचीन फोटोग्राफर रह चुके हैं। अपने पैशन के साथ जीते हुए भावना को 38 साल बीत चुके हैं। भावना की निजी जिंदगी कैमरे के रंगों की तरह ही हमेशा एक जैसी नहीं रही। बीमारियों और दुश्वारियों ने कई बार भावना को अपने चक्रव्यूह में फंसाने की कोशिश की, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। भावना हर संकट को मात देकर आगे बढ़ीं और अपने कैमरे से लोगों को दुनिया दिखाती रहीं।Bhavna Jaiswal_Pozitive India                                                                           Photography by Bhavna

बीमारियों के चलते 6 सर्जरी करा चुकीं भावना पॉजिटिव माइंड सेट को जिंदगी में आगे बढ़ने का मूलमंत्र मानती हैं। पिछले 20 साल से भोपाल के पॉलिटेक्निक कॉलेज में नौकरी कर रही भावना ने महिला दिवस के मौके पर अपनी जीवन यात्रा पर विस्तार से बात की। उनका कहना है कि जीवन पथ पर अवॉर्ड नहीं काम बोलता है, अगर आप अपने शौक को जुनून बनाकर मेहनत करते हैं तो देर सबेर आपके काम को पहचान मिलती है।

2012 में देश के आठ अलग-अलग शहरों में 12 अलग विषयों पर आधारित उनकी फोटो एग्जिबीशन लग चुकी हैं। इन एग्जिबीशन के जरिए लोगों ने उनके हुनर को करीब से देखा और पहचाना। साल भर में 14 फोटो प्रदर्शनी का गौरव हासिल कर चुकी भावना का 2010 के हरिद्वार कुंभ में मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से ऑफीशियल फोटोग्राफर रह चुकी हैं। कुंभ के दौरान खींचे गए उनके फोटोग्राफ्स ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। 2016 के उज्जैन सिंहस्थ मेले में भी वो प्रदेश सरकार की तरफ से भेजी गई अकेली महिला फोटोग्राफर थीं।Bhavna Jaiswal_Pozitive India सात भाई बहनों वाले परिवार में पली बढ़ी भावना आम आदमी की भावनाओं को बेहद करीब से देखती समझती रही हैं। उनके पति नीरज रिछारिया भी पेशे से फोटोग्राफर हैं। नीरज ने जिंदगी के हर कदम में उनका साथ निभाया है। पचास की उम्र पार कर चुकी दो बच्चों की मां भावना को करीब से जानने वाले कहते हैं कि पिछले कुछ वक्त से भावना जिस तरह की शारीरिक परेशानियों से जूझ रही हैं। उनके बीच अपने फोटोग्राफी के जुनून को कायम रखना उनके जज्बे को बयां करता है। अपनी सेकेंड इनिंग खेल रही भावना वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी की दुनिया की सशक्त हस्ताक्षर हैं। भावना का कहना है कि उनको नेचर और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी हमेशा आकर्षित करती है।Bhavna Jaiswal_Pozitive Indiaपिता नवल जायसवाल के साथ 1985 में पहली बार फोटो खींचने के बाद भावना ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिता को आदर्श मानने वाली भावना ने शादी के बाद भी अपना सरनेम नहीं बदला। उन्होंने अपने पापा से वादा किया है कि जब तक जिंदा रहेंगी उनके नाम को जिंदा रखेंगी। अपने इस वादे पर कायम भावना का कहना है कि आदमी काम से जाना जाता है नाम से नहीं। पुरुषों का काम माना जाना वाला फोटोग्राफी प्रोफेशन जिस तपस्या और लगन की डिमांड करता है। भावना के अंदर वो कूट-कूटकर भरा है। महिला दिवस के मौके पर पॉजिटिव इंडिया भावना के जुनून और जज्बे को सलाम करता है। Bhavna Jaiswal_Pozitive India

नीचे देखिए भावना जी के कैमरे से ली गईं कुछ और खूबसूरत तस्वीरें…. 

Bhavna Jaiswal_Pozitive India

नीचे देखिए भावना जी के कैमरे से ली गईं कुछ और खूबसूरत तस्वीरें…. 

Bhavna Jaiswal_Pozitive India

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