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शाहवर हसन: कभी लोग बनाते थे मजाक, आज जमाने भर में दी जाती है मिसाल

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ये कहानी एक ऐसे युवा की है, जिसने दुनिया से हटकर अपनी एक अलग दुनिया बनाने की सोची। अपने सपने खुद बुने, अपनी नई सोच के सहारे सफलता के पैमाने खुद गढ़े। जो सोचा, जो ठाना वो किया। जुनून को अपनी शक्ति और आईडिया को मकसद मानकर अपना कारोबार खड़ा किया। यकीनन एक आम लड़के के खास बनने की ये कहानी आज उस जैसे देश के लाखों युवाओं को कुछ अलग और नया करने की प्रेरणा दे रही है। जब कोरोना संकट काल में उसकी उम्र के बाकी लड़के अपने घरों में बंद थे, तब वो सब कुछ भूल अपनी जिद को कामयाबी की जमीन पर उतारने की जद्दोजहद में जी-जान से जुटा था। जिद, जुनून में बदला और दुनिया के दस्तूर को बदलने निकल पड़ा वो अपने यार के साथ। देखते ही देखते वो अपने सपनों के सारथी भी बने और कामयाबी के नए कीर्तिमान भी गढ़े।

कभी खत्म करना चाहते थे खुद की जिंदगी…Shahwar hasan_pozitive india

जिंदगी सबको वैसी नहीं मिलती, जैसी हम चाहते हैं। कोई न कोई कमी हर किसी में रह जाती है। कोई अपनी कम हाइट के कारण जिंदगी भर दुनिया के तानों से फाइट करता है, तो कोई अपने मोटापे, रंगभेद या फिर किसी दूसरी शारीरिक कमजोरी के कारण लोगों की बेरुखी का शिकार हो जिंदगी से ही उदास हो जाता है। बढ़ती उम्र के बावजूद लड़कियों की तरह आवाज होना भोपाल के शाहवर हसन के लिए भी किसी प्रताड़ना से कम नहीं था। टीनेज (किशोर) अवस्था तक पहुंचने पर पतली आवाज (Girly Voice) के कारण उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 

गली-मोहल्ले से लेकर स्कूल तक सब उसका मजाक बनाते…बीच रास्ते पर रोक कर तरह-तरह के तंज कसे जाते… वो एक दम अकेला पड़ चुका था, अपनी जिंदगी से तंग आ गया था। ना स्कूल में कोई दोस्त और ना ही कॉलोनी में उसके दर्द को समझने वाला कोई यार। सिर्फ लड़कियों की तरह आवाज होने की इतनी बड़ी कीमत उसे छोटी उम्र से ही चुकानी पड़ रही थी। ऐसी हालत में कई लोग हार मान लेते हैं और गहरे डिप्रेशन में चले जाते हैं। शाहवर भी डिप्रेशन का शिकार हुए। सबसे दूर, खुद को एक दम अकेला कर लिया। यहां तक कि अपना शहर भोपाल तक छोड़ दिया और पंजाब की एक निजी यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। शहर तो बदल लिया लेकिन लोगों का नजरिया यहां भी वही। यहां भी उसे अपनी आवाज के लिए शर्मिंदा होना पड़ता। आखिरकार तंग आकर उसने भी बाकी लोगों की तरह अपनी जिंदगी को ही खत्म करने का फैसला लिया, दो बार खुदकुशी की कोशिश भी की लेकिन शायद उसकी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।Shahwar hasan_pozitive indiaफिल्मी सी लगने वाली ये असल और इंस्पायरिंग कहानी है भोपाल में रहने वाले शाहवर हसन की। जो आज एक बेहद कामयाब उद्यमी होने के साथ ही मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। कम उम्र में कई बड़ी कामयाबी अपने नाम करने वाले शाहवर ने अपने बुलंद इरादों और नई सोच से लोगों की सोच को बौना साबित करके दिखाया। शाहवर एक बेहद सफल ट्रैवल टेक स्टार्टअप  कंपनी ‘किंग हिल्स’ के फाउंडर हैं, जिसने लॉकडाउन-1 के दौरान अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए बड़ा मुनाफा कमाया।

28 साल के शाहवर हसन किंग हिल्स ट्रेवल्स के अलावा Eco King (Eco-Friendly Golf Carts & E-Vehicles Services Company)… Approach E-Services LLP (Business Consultancy/Startups Branding & Marketing Company)… Approach Education & Social Welfare Society (Focus Based Learing System/Motivational Sessioons at Institutes) के भी सीईओ और संस्थापक हैं।

जिंदगी से निराश, डिप्रेसन का शिकार और एक सहमे हुए लड़के से लेकर एक कामयाब युवा एंटरप्रेन्योर बनने का शाहवर का सफर इतना आसान नहीं रहा। निराशा और अवसाद की काली रात, हर तरफ मुश्किलें और हार का भय। चुनौतियां मुंह बाए अपने विकराल रूप में खड़ी रहीं, जिंदगी की काली रात का भोर दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा था। कई बार ऐसा लगा नहीं शायद अब और नहीं मगर तभी उन्हीं अंधेरों के बीच से जिंदगी ने कहा कि देखो उजास हो रहा है।Shahwar hasan_pozitive indiaबतौर मोटिवेशनल स्पीकर आज दूसरों की उदास जिंदगी में उम्मीदों के नए रंग भरने वाले शाहवर हसन कभी खुद जिंदगी से उम्मीद हार चुके थे। कड़वे अनुभव से भरे पड़े अपने अतीत के पन्नों को पलटते हुए वो बताते हैं कि लड़कियों की तरह आवाज होने के कारण 13 साल की उम्र तक वो किसी से बात तक नहीं करते थे और लोगों से नजरें चुराते थे। यहां तक कि सोसायटी के तानों से बचने के लिए उन्होंने साल 2011 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। शाहवर आगे बताते हैं कि यहां आने के बाद मुझे अहसास हुआ कि लोग तो हर जगह एक जैसे ही हैं। उन्हें नहीं बदला जा सकता, बेहतर यही है अपनी कमजोरी और समस्या से दूर भागने की बजाए एक बार सबका सामना किया जाए।

शाहवर के मुताबिक उन्होंने सुसाइड से पहले खुद को एक आखिरी चांस देने का फैसला लिया और शायद यही एक क्षण शाहवर की जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। अब वो लोगों से नजरे चुराने की बजाए खुद उनके बीच जाते और अपने फनी जोक्स बनाकर सबको हंसाने की कोशिश करते। धीरे-धीरे उनका मजाकिया अंदाज लोगों को पसंद आने लगा। तो वहीं लोगों के बीच अपनी वैल्यू देखकर उनका कान्फिडेंस भी बढ़ने लगा।

यहां से शुरू हुआ जिंदगी का नया सफरShahwar hasan and deepak

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान शाहवर की मुलाकात दीपक और नवीन चौधरी से हुई। राजस्थान के सीकर से ताल्लुक रखने वाले दीपक धायल वैसे तो शाहवर के जूनियर थे लेकिन आगे जाकर तीनों अपने स्टार्टअप में बराबर के पार्टनर बने। दरअसल एक सोच रखने वाले शाहवर, दीपक और नवीन को जॉब करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, क्योंकि तीनों खुद के बनाए रास्ते पर चलकर अपनी मंजिल हासिल करना चाहते थे। लिहाजा तीनों ने साथ मिलकर गोल्फ कार्ट की मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही बड़े-बड़े कैंपस के अंदर बेहद सस्ते दाम पर ई-व्हीकल्स की सर्विस प्रोवाइड कराने का काम शुरू किया।
Kinghills travells at LPU

पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान शाहवर बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले इको फ्रेंडली गोल्फ कार्ट की मैन्युफैक्चरिंग कर उसे रेंट पर देना शुरू किया। करतारपुर कॉरिडोर के लिए होम मिनिस्ट्री को उनकी कंपनी ने ही रेंट पर गोल्फ कार्ट मुहैया कराया है। इसके अलावा कई बड़े-बड़े कैंपस में भी उन्होंने इको फ्रेंडली गोल्फ कार्ट के साथ ही स्टूडेंट्स की सहूलियत के लिए ई-व्हीकल्स की सुविधा भी मुहैया कराई है।

2020 में रखी ट्रैवल टेक स्टार्टअप की नींवKinghills travells

शाहवर के मुताबिक गोल्फ कोर्ट मैन्युफैक्चरिंग के बिजनेस के दौरान उनके पास हॉलीडे पैकेज की कई इंक्वायरी आती थी। हालांकि उनके लिए ये एकदम नया काम था और कोई तजुर्बा भी नहीं था, लिहाजा काफी काफी सोच-विचार और रिसर्च के बाद ही इस नए सेक्टर में उतरने का डिसीजन लिया। शाहवर और दीपक ने इस ट्रैवल टेक स्टार्टअप में ग्रुप डिपार्चर पर फोकस किया, क्योंकि ये पॉकेट फ्रेंडली होते हैं और अच्छी सुविधाएं मिलती हैं। इसमें कंपनी के ट्रैवल मैनेजर, कंसल्टेंट टूरिस्ट के साथ जाते हैं।

शाहवर बताते हैं कि इस दौरान हमने महसूस किया कि छोटे शहरों से ग्रुप डिपार्चर की सुविधा अभी तक कस्टमर के पास नहीं थी। कंपनियां टूरिस्ट को दिल्ली या मुम्बई बुलाकर वहां से डिपार्चर करती थीं। इसलिए हमने तय किया कि टूरिस्ट के शहर से ही डिपार्चर करेंगे और यहीं पर वापसी होगी। इसके अलावा हमने कपल स्पेशल के लिए अलग ग्रुप्स बनाए, फैमिली के लिए अलग और बैचलर्स के लिए अलग।

टेक्नालॉजी की मदद से ट्रैवलिंग को बनाया आसानKinghills travells

शाहवर बताते हैं कि 3 जनवरी 2020 को इस कारोबार की शुरूआत की थी। हमने ट्रैवलिंग को टेक्नोलॉजी से जोड़ा, ताकि जब कोई घूमने निकले तो उसके पैरेंट्स, रिश्तेदार या फ्रेंड्स उसकी सेफ्टी और सिक्योरिटी को लेकर बेफिक्र रहें। इसके लिए हमने अपने ऐप पर कुछ फीचर्स दिए हैं, जिससे आप उन्हें ट्रैक या मॉनिटर भी कर सकते हैं। ऐप के फीचर को लेकर शाहवर कहते हैं कि जब आप ऐप के जरिए कोई ट्रिप बुक करते हैं तो इसकी जानकारी ऑपरेशन टीम को जाती है, फिर आपको ट्रैवल मैनेजर असाइन होता है। यह ग्रुप की संख्या और जरूरत के मुताबिक वर्चुअल और फिजिकल दोनों मोड में उपलब्ध होता है। यह आपकी पैकिंग में मदद कराता है। मसलन, क्या रखना है, क्या नहीं रखना है। आपको जो गाड़ी या होटल अलॉट होता है वो भी ऐप पर ही दिखेगा। इसके साथ ही हर टूरिस्ट को एक शेयर कोड अलॉट होता है, इसे आप अपनी फैमिली से शेयर करेंगे तो वो आपको इसी ऐप के जरिए आपकी लोकेशन मॉनिटर कर सकेंगे।

लॉकडाउन से हुआ नुकसान, हौंसलों से हासिल किया बड़ा मुकामKinghills travells

शाहवर और दीपक ने अभी उड़ान भरने के सपोनो संजोए ही थे कि बिजनेस शुरू करने के महज दो महीने बाद ही पूरे देश में लॉकडाउन लग गया। शाहबर कहते हैं कि हमने एक लाख रुपए की लागत से बिजनेस शुरू किया था। यह पैसा ऐप बनवाने में खर्च हुआ था। जब हमने बिजनेस की शुरुआत की तो दो महीनों में बामुश्किल डेढ़ लाख रुपए का बिजनेस ही किया था, इस बीच लॉकडाउन की घोषणा हो गई और पूरा बिजनेस ठप हो गया। अप्रैल और इससे आगे की सभी बुकिंग कैंसिल की और कस्टमर को 100 प्रतिशत रिफंड देना पड़ा।

लॉकडाउन के दौरान सात महीनों तक जीरो बिजनेस रहा। इन सात महीनों में हमारी पूरी सारी सेविंग्स तक खत्म हाे गई। उस वक्त हमारे पास गूगल प्ले स्टोर पर अपने ऐप की महज 1800 रुपए फीस भरने तक के पैसे नहीं बचे थे। इस बीच घरवालों ने कहा कि ट्रैवल इंडस्ट्री में अब अगले तीन-चार सालों तक कोई स्कोप नहीं है, इसलिए कुछ और करो या नौकरी करो। लेकिन मैं इसी बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहता था।

Kinghills travellsशाहवर कहते हैं कि हमने लॉकडाउन के पीरियड में अपने स्टार्टअप को और बेहतर बनाने के तमाम आइडियाज पर काम किया। अपने बिजनेस को बढ़ाने पर काफी रिसर्च की। और फिर 10 नवंबर को जब हमने दोबारा अपना बिजनेस शुरू किया, तो ये सोच कर किया कि अब आर या पार ही होगा। या तो हम खेल जाएंगे या इसे बंद कर देंगे। लेकिन शुरुआत में हमें काफी नुकसान झेलना पड़ा क्योंकि जब लोग बड़े ग्रुप में आते हैं तभी फायदा होता है। फिर भी हमने किसी भी कस्टमर को मना नहीं किया और ना ही कोई ट्रिप कैंसिल की भले ही हमें घाटा उठाना पड़ा हो। हमने होटल्स से टाइअप किया कि आपका पैसा थोड़ा-थोड़ा करके दे देंगे। चूंकि होटल इंडस्ट्री भी इतने समय से बंद थी, लिहाजा वो भी तैयार हो गए। धीरे-धीरे लोग हमारा काम के प्रति कमिटमेंट देखकर प्रभावित होने लगे। इसके बाद कुछ लोगों ने हमारे बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग शहरों में ब्रांच ऑफिस खोले और हमारे साथ काम करना शुरू किया। यही वजह रही कि लॉकडाउन-1 के बाद के पांच महीनों में हम 3500 से अधिक लोगों को ट्रैवल करा चुके हैं और 2 करोड़ रुपए का बिजनेस बी कर चुके हैं।

शाहवर के मुताबिक आज भोपाल के अलावा इंदौर, रायपुर, जालंधर, लुधियाना, फगवाड़ा, अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, जयपुर और सीकर में ब्रांच ऑफिस हैं। इसके अलावा जल्द ही वो दुबई में भी एक ब्रांच ऑफिस खोलने की तैयारी में हैं। वहीं कुछ इनवेस्टर्स को भी उनका आइडिया काफी पसंद आया है और उन्होंने स्टार्टअप में इनवेस्ट करने में दिलचस्पी दिखाई है।

लॉकडाउन में लिखी किताबShahwar hasan_pozitive india

शाहवर ने लॉकडाउन के दौरान स्टार्टअप की दुनिया में नया-नया कदम रखने वालों की मदद के लिए स्टार्टअप गाइड से एक किताब लिखी है। स्टार्टअप गाइड आपको बताएगी कि कैसे कम कास्ट में अच्छा बिजनेस ग्रो किया जाए। साथ ही आपके अंदर छिपी स्किल्स को निखारने में भी मदद करती है।

शाहवर हसन एक स्टार्टअप मेंटर भी हैं और बहुत से स्टार्टअप को कंसल्टेंसी देने के साथ ही कई सेमिनार और वर्कशॉप ले चुके हैं। शाहवर महज बीस साल की उम्र से स्कूल-कॉलेज जाकर स्टूडेंट्स के लिए मोटिवेशनल सेमिनार भी आयोजित करते हैं। जहां वो छात्रों को संदेश देते हैं कि अपनी जिंदगी से ना शब्द निकाल दें, नामुमकिन कुछ नहीं होता। अपनी सोच को पॉजिटिव बनाइए फिर आप जो चाहेंगे उसे पा लेंगे।

शाहवर हसन कहते हैं कि लॉकडाउन और उसके बाद कई सारे लोगों की नौकरियां चली जाएंगी और युवाओं के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में वो अपना खुद का नया बिजनेस कम लागत में कैसे खड़ा कर सकते हैं, ये किताब उन्हें गाइड करेगी।शाहवर के मुताबिक स्टार्टअप को लेकर किताबें तो बहुत सारी उपलब्ध है, लेकिन उनकी लैग्वेंज काफी टफ होती है जबकि मैंने आसान शब्दों में स्टार्टअप या बिज़नेस करने के बारे में यहाँ सब कुछ लिख दिया है जिससे कोई भी इंसान आराम से अपना बिज़नेस शुरू कर सकता है।Shahwar hasan_pozitive indiaकम उम्र में बड़ी कामयाबी अपने नाम कर चुके शाहवर हसन की कहानी आज के नकारात्मक दौर में युवाओं को विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का हौसला दे रही है। साथ ही यह भी साबित करती है कि कुछ बड़ा और अलग करने के लिए अथाह पूंजी और संसाधनों की जरूरत नहीं होती, जरूरत होती है तो सिर्फ एक नई सोच की, कुछ कर दिखाने के जुनून की, खुद के संजोए सपनों को पूरा करने के पागलपन और खुद को साबित करने की उस शिद्दत की जो आपको न सोने देती है, न रुकने देती है और न ही कभी थकने देती है।

पॉजिटिव इंडिया की कोशिश हमेशा आपको हिंदुस्तान की उन गुमनाम हस्तियों से मिलाने की रही है जिन्होंने अपने फितूर से बदलाव को एक नई दिशा दी हो और समाज के सामने संभावनाओं की नई राह खोली हो।

हर रोज आपके आसपास सोशल मीडिया पर नकारात्मक खबरें और उत्तेजना फैलाने वाली प्रतिक्रियाओं के बीच हम आप तक समाज के ऐसे ही असल नायक/नायिकाओं की Positive, Inspiring और दिलचस्प कहानियां पहुंचाएंगे, जो बेफिजूल के शोर-शराबे के बीच आपको थोड़ा सुकून और जिंदगी में आगे बढ़ने का जज्बा दे सके।

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