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IAS भरत यादव: ‘ट्रेन में टिकट चेकर से काबिल कलेक्टर तक’

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असल जिंदगी की कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो हमें सपनों पर यक़ीन करना सिखाती हैं। जिंदगी के पथरीले सफर में पहाड़ सी परेशानियों को परास्त कर आगे बढ़ना सिखाती हैं। हमारी आज की कहानी भी संघर्ष से टूटकर बिखरने के बजाय, संघर्ष से लड़कर निखरने की कहानी है। ये कामयाबी की वो कहानी है जिसका ताना-बाना कड़ी मेहनत, बड़ी शिद्दत और लगन से बुना गया है। जी हां ये एक छोटे से गांव के किसान परिवार में जन्मे एक आम शख्स की असाधारण सफलता की असल और अनसुनी कहानी है। सपनों की कीमत और अहमियत क्या होती है, अगर आपको समझना है तो बस एक बार जबलपुर कलेक्टर आईएएस भरत यादव से मिल लीजिए। हालात और किस्मत का रोना भूलकर अपनी मेहनत के बूते सपनों को सच की सूरत में कैसे ढाला जाता है,आप बखूबी समझ जाएंगे। भरत यादवजी का जन्म दतिया के उदगवां गांव में एक छोटे से किसान परिवार में हुआ। एक भाई टीचर थे। पांचवी तक गांव की सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ाई की । फिर 6वीं से 10वीं तक शिवपुरी के नवोदय स्कूल में पढ़ाई की।

भरतजी बताते हैं, कभी आईएएस का सोचा नहीं था लेकिन नवोदय विद्यालय में पढ़ते वक्त एक बार वहां जिले के कलेक्टर आए। विद्यालय का भवन जर्जर था उन्होंने तत्काल उसकी मंजूरी दे दी और भवन बन गया। यही वो पल था जब मैने तय कर लिया कि जिंदगी में कलेक्टर ही बनना है।

10वीं की पढ़ाई के दौरान ही रेलवे में वोकेशनल कोर्स के लिए चयन हो गया। रेलवे के माध्यम से ही 11वीं और 12वीं की पढ़ाई मुंबई में की। 12वीं के बाद साल 1999 में रेलवे में टीटीआई के लिए चयन हो गया। ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी से असंस्थागत छात्र के रूप में बीए और राजनीति विज्ञान में एमए किया। रेलवे में नौकरी के दौरान ही पीएससी की तैयारी की। साल 2008 में यूपीएससी में चयन हुआ और मप्र कैडर के आईएएस अफसर बने। देश में 76 रैंक थी और मप्र में टॉप किया।

आसान नहीं था रेलवे की नौकरी से आईएएस बनने का सफर

संकल्पों को अंजाम तक पहुंचाना आसान नहीं होता। लेकिन भरतजी ने कभी अपनी ख़्वाहिश धुंधली नहीं पड़ने दी। जैसे-तैसे खुद के बूते तैयारी करके रेलवे में टीटीई तो बन गए लेकिन कलेक्टर बनने का सपना उनके जेहन में तैरता रहा। ट्रेनों में टिकट चेक करते हुए वो रातों के सफर के दौरान किताबें पढ़कर यूपीएससी की तैयारियां करते थे, तब सहकर्मी उनकी खिल्ली उड़ाते थे ‘ लो ये चले हैं कलेक्टर बनने” अरे भाई जो नौकरी मिल गई उसी में सब्र करो। हालांकि आसपास का वातावरण हतोत्साहित करने वाला था, लेकिन संकल्प उस जिद को पूरा करने का हौसला देता था कि कलेक्टर तो जरूर बनना है। यह जुनून और जिद ही थी कि हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल में पढ़कर भी भरत यादव आखिरकार आईएएस बने। 

कुछ लोग भले ही साधारण परिवार में जन्म लेते हैं लेकिन उनमें इतनी काबिलियत होती है कि वो इसी के दम पर अपने सपनों को हकीकत में तब्दील करने में कामयाब हो जाते हैं या फिर यूं कह लीजिए कि मजबूत इरादे और मंजिल पाने के लिए मेहनत करने का जुनून किसी भी व्यक्ति को कामयाबी के शिखर तक पहुंचाने के लिए काफी है।

एक तिनके से शुरू करके पूरा का पूरा सपनों का शहर बना लेना इतना आसान नहीं होता लेकिन जुनून एक ऐसी चीज है जिसके आगे कुछ नामुमकिन भी नहीं होता। भरत यादवजी की कहानी भी कुछ यही कहती है। जिन सरकारी स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई को लेकर अक्सर सवालिया निशान लगता रहा है, एक बड़ा वर्ग जिन सरकारी स्कूलों को हमेशा हेय की नजर से देखता है, भरत यादवजी से उसी स्कूल से निकलकर एक आईएएस अफसर बनते हैं और साबित करते हैं कि सरकारी स्कूल में पढ़कर भी जिंदगी में श्रेष्ठ मुकाम पाया जा सकता है। उनकी कामयाबी सरकारी स्कूलों को लेकर चली आ रही नकारात्मक परिपाटी को तोड़कर मुश्किलों से जूझते हर एक नौजवान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

बेहतर काम, अलग है अंदाज

वैसे तो कलेक्टर शब्द सुनते ही आंखों के सामने शानदार दफ़्तर, लग्जरी गाड़ी और जी हजूरी करते मुलाज़िम वाला नज़ारा घूम जाता है लेकिन कुछ अफ़सर ऐसे भी हैं जिनके काम करने का अंदाज सबको चौंका देता है। वो सारा तामझाम छोड़कर खुद आम आदमी के बीच पहुंचते हैं। उनके लिए पद कोई ऐशो आराम का साधन नहीं बल्कि समाज सेवा का एक बेहतर माध्यम मात्र है। ऐसे ही एक आईएएस अफसर हैं जबलपुर कलेक्टर भरत यादव, जिनका मानना है कि “भारतीय प्रशासनिक सेवा में हूं तो अधिक से अधिक लोगों के टच में रहूं, उनका दुख-दर्द समझूं और उनके किसी काम आउं।

हाथों की लकीर बदलकर अपनी तकदीर खुद लिखने वाले भरत यादवजी की कलेक्टर बनने की कहानी तो प्रेरणादायक है ही लेकिन कलेक्टर के रूप में सेवा की कहानी और भी प्रेरणादायक और अनुकरणीय है।

2008 बैच के आईएएस अफसर भरत यादव को आसानी से उपलब्ध और सामाजिक सरोकार से जुड़े कामों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले कलेक्टर के तौर पर पहचाना जाता है। कलेक्टर रहते हुए उन्होंने हर जगह सामाजिक सरोकारों का खास ख्याल रखा। जरूरत पड़ने पर लोग आधी रात को भी उनसे बात कर सकते हैं। भरत यादवजी गांव-गांव जाकर खुद लोगों से मिलते हैं। उनका मानना है कि इस ओहदे पर आने के बाद स्वयं पर नियंत्रण बनाए रखना एक चैलेंजिंग टास्क है। फिर दूसरी चुनौती परिवार और काम के बीच समन्वय बनाने की होती है। 

नेत्रदान कर कायम की मिसाल

सिवनी में कलेक्टर रहते हुए भरत यादवजी ने दिव्यांग बच्चों के एक स्कूल के लिए बड़ा चैरिटी शो कराकर डोनेशन जुटाया और अपने इरादे जाहिर किए। नेत्रहीन बच्चों से मिलने के बाद उनकी जिंदगी में एक बड़ा परिवर्तन आया और उन्होंने फौरन ही अपनी दोनों आंखें दान देने का फैसला लिया। इस काम में उनकी पत्नि प्रियंका यादवजी ने भी साथ दिया और अपने नेत्रदान कर समाज और दूसरे अफसरों के सामने एक मिसाल कायम की।युवा-उर्जावान आईएएस भरत यादव बेहद सहज और सौम्य हैं लेकिन जिम्मेदारी के प्रति ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ वो सख्त रवैया अपनाने से भी पीछे नहीं हटते। सूबे में सोशल मीडिया के जरिए जन समस्याओं के समाधान की अभिनव पहल का श्रेय भी उन्हें जाता है। जरूरी होने पर वो व्हाट्स एप और फेसबुक के जरिए ही फरियादी की समस्या का समाधान कर देते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वो जहां भी रहे कई माइल स्टोन’ स्थापित किए।

बालाघाट में बदलाव की बयार

बेशकीमती बांस वन और बेटियों के लिए मशहूर बालाघाट में कलेक्टर रहते हुए भरत यादवजी ने महिलाओं के सर्वाधिक लिंगानुपात को बरकरार रखने के साथ ही जंगल के उन्नयन के लिए बेहतरीन काम किया। लिंगानुपात में सुधार के लिए उन्हें तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की तरफ से अवार्ड भी मिला। इसके अलावा बालाघाट में 150 दिव्यांग जोड़ों का विवाह कराया और लाल आतंक यानि नक्सलियों से निपटने के लिए कई कारगर योजनाएं शुरू की।

प्रोजेक्ट गुरुवाणी के जरिए बदली गरीब छात्रों की जिंदगी

पिछड़ा जिला कहे जाने वाले बालाघाट के कलेक्टर रहते हुए आईएएस भरत यादव ने यहां के कमजोर परिवार से आने वाले आदिवासियों के होनहार बच्चों के हुनर को तराशने का बीड़ा उठाया। छात्रों का हौंसला अफजाई कर खुद  मार्गदर्शन दिया और जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलो से लगभग 400 स्कूली बच्चों को प्रोजेक्ट गुरूवाणी के तहत बालाघाट में जेईई और नीट परीक्षा के लिए कोचिंग की सुविधा मुहैया कराई। जिसमें से जेईई मेन्स में 33 छात्र-छात्राओं का चयन हुआ,खास बात ये रही कि उनमें से ज्यादातर बच्चे गरीब परिवार और नक्सल प्रभावित ईलाकों से थे। ग्वालियर में कलेक्टर के पद पर रहते हुए बेसहारा गौवंश के प्रबंधन की प्रभावी योजना बनाई और क्रियान्वन किया। जिसका नतीजा ये रहा कि गौवंश के संरक्षण के क्षेत्र में ग्वालियर जिला पूरे प्रदेश के लिए नजीर बन गया। 

नवोदय विद्यालय से हिंदी माध्यम में पढ़कर आईएएस बनने वाले भरत यादव की लोकप्रियता बताती है कि वो उन युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं जो मुश्किल परिस्थितियों में आईएएस बनने का अपना सपना अधूरा छोड़ देते हैं। 

 वहीं जबलपुर में नौनिहालों के सपनों को उड़ान देने के लिए सार्थक पहल करते हुए कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम शुरू किया। जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ सके और करियर चुनने में मदद मिले। इसके अलावा सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को जीवन प्रबंधन यानी लाइफ मैनेजमेंट के गुर सिखाने की एक और अभिनव पहल की ताकि बच्चों को नंबरों की होड़ से बाहर निकालकर हताशा और निराशा को त्याग, सफलता के मुकाम पर पहुंचने की टिप्स दी जा सकें।

इस कहानी को सामने लाने का मकसद भी सिर्फ यही है कि आज देश के युवा सीख सकें कि जिंदगी के पथरीले सफर में सपनों का पीछा कैसे किया जाता है। आईएएस भरत यादव की कहानी से एक और सीख मिलती है कि चाहे त्रेतायुग में समुद्र पर पुल बनाने वाले नल-नील हों, सड़क की रोशनी में पढ़ाई कर अमेरिका के राष्ट्रपति बने इब्राहिम लिंकन हों या फिर पहाड़ काट कर रास्ता बनाने वाले दशरथ माझी हों, जमाने में नजीर वही बनते हैं जिनमें परेशानियों के पहाड़ और चुनौतियों के तूफान से भिड़ने की हिम्मत होती है।

हर रोज आपके आसपास और सोशल मीडिया पर नकारात्मक खबरें और उत्तेजना फैलाने वाली प्रतिक्रियाओं के बीच Pozitive India की कोशिश रहेगी कि आप तक समाज के  ऐसे हीअसल नायकों की Positive, Inspiring और दिलचस्प कहानियां पहुंचाई जा सकें, जो बेफिजूल के शोर-शराबे के बीच आपको थोड़ा सुकून और जिंदगी में आगे बढ़ने का जज्बा दे सकें।

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6 Comments

  1. Tyagiji Maharaj October 19, 2019

    हमे गर्व है आप पर आप जैसे लोगों की जरूरत है समाज को बदलने के लिए समर्पित हो जहाँ जाति धर्म बाधक न हो सिर्फ एक ही उद्देश्य समाज का सच्चा निर्माण सबको सुखी देखना चाहते हैं आप ।
    मेरा सौभाग्य है
    विश्व का पहला स्वर्ग निर्माण धरती पर कर रहे हैं त्यागी जी महाराज स्वर्ग नगरी सर्व धर्म तीर्थ धाम विलायत कला कटनी मध्य प्रदेश भारत

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    1. Mayank Shukla October 19, 2019

      थैंक्यू सर। आप लोगों का समर्थन ही हमारा हौंसला है।

  2. सर आपने बहुत सराहनीय कार्य किये हैं।salute sir
    मुझे गर्व है कि आप जिस स्कूल से पढें हुए हैं।मुझे भी उस स्कूल jnv shivpuri mp मे पढने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
    Proud of you sir हमी नवोदय हो..

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  3. Tulsidas Nunse CTI.Manmad. October 23, 2019

    समाज के लोगों के प्रति आप कार्य सराहनीय है ।

    आप के पास पावर और यंत्रणा है, प्रयावरण को बचाने के लिए के लिए आप बहुत कुछ कर सकते हैं ।
    यह समय की मांग है, ताकि हमारी अगली पीढ़ी और समस्त संसार को बचाया जा सके ।
    धन्यवाद, और शुभकामना.

    Reply
  4. समाज के लोगों के प्रति आप का कार्य सराहनीय है ।

    आप के पास पावर और यंत्रणा है, प्रयावरण को बचाने के लिए के लिए आप बहुत कुछ कर सकते हैं ।
    यह समय की मांग है, ताकि हमारी अगली पीढ़ी और समस्त संसार को बचाया जा सके ।
    धन्यवाद, और शुभकामना.

    Reply
  5. Sharad kumar joshi May 5, 2020

    Inspirational

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