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#Saturn Return

#Saturn Return: दीपिका की उड़ान का शनि कनेक्शन

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दीपिका पादुकोण के प्यार पर शनि की टेढ़ी नज़र पड़ी और वो निहाल हो गईं ! शनि की कृपा अक्सर सज़ा की तरह लगती है। हालांकि दिल टूटने का दर्द वही जानता है जिसे प्यार में रुसवाई से होकर गुज़रना पड़ा हो लेकिन वो भी सच है जो कभी शहरयार ने उमराव-जान के गीत में बड़ी आसानी से कह दिया था- “जुस्तजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमनें, इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने…” 2012 में जब दीपिका का ब्रेक-अप हुआ तो वे भी खुद को मिली इस सज़ा के बारे में सोच-सोचकर परेशान रही होंगी। परेशां क्या डिप्रेशन की शिकार हो गईं थीं । आखिर बॉलीवुड के सबसे नामी ख़ानदान की बहू बनने का सपना जो देख बैठी थीं वो… और ऐसे सपने जब टूटते हैं तो तकलीफ तो होती ही है। शनि की इंट्री से मिली यही तकलीफ़ और उसके बाद मिलने वाली सही उड़ान ही आज के सैटर्न रिटर्न की कहानी का सार है !deepika padukone 5 जनवरी 1986 को कोपेनहेगन, डेनमार्क में दीपिका पादुकोण ने पूर्व अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण के घर जन्म लिया। पापा प्रकाश पादुकोण से उन्हें सहज ही बैडमिंटन की विरासत मिली, जिसे उन्होंने नेशनल लेवल तक खेलते हुए निभाया भी, लेकिन उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि उनकी उड़ान अलग है। लेकिन वह ‘अलग’ क्या है? उन्हें तब भी पता नहीं था और बहुत वक्त तक पता ही नहीं चला। हां कई बार अपने उस निज की पहचान के बिना भी रास्ते पार होते जाते हैं, दीपिका भी उन सभी सोपानों को पार करती गईं। मॉडलिंग से लेकर हिन्दुस्तान टाइम्स की लाइफस्टाइल मैगज़ीन के लिए फ्रीलांस का काम भी उन्होंने किया और आखिरकार साउथ के रास्ते मात्र 20 साल की उम्र में फिल्मों में दाखिल हो गईं। हालांकि उनका बॉलीवुड डेब्यू रही फराह खान निर्देशित – ओम शांति ओम(2007) और फिल्म की सफलता से दीपिका रातों-रात स्टार बन गईं।

फिर अगले ही साल 23 साल की उम्र में उनकी ज़िन्दगी में ‘बचना ए हसीनों’(2008) घटित हुई और दीपिका स्टार-डम के साथ-साथ प्यार के कॉकटेल में भी डूब गईं। यह भी अजब इत्तिफ़ाक था कि उन्होंने जो फिल्म की थी उसी में कुदरत की तरफ से ‘बचना ए हसीनों…’ वाला मैसेज था, कायदे से एक हसीना होने के नाते उन्हें खुद भी बचना चाहिए था, पर कॉकटेल के शिकार ये सब होश वाली चीजें क्या जाने…? खैर ‘लव आज कल’(2009) करते-करते ‘कॉकटेल’(2012) भी खत्म हो गया और ठीक 27वें साल में जब उन्हें होश आया तो उनका ब्रेक-अप हो चुका था। छन से जो टूटे कोई सपना… वाला दर्द लेकर खुद उनका दिल रो रहा था। दीपिका मीडिया के सामने तो हंसती मुस्कुराती नज़र आ रहीं थी, जूनियर माल्या के साथ क्रिकेट मैच के दौरान दर्शक दीर्घा में हाथ हिला रहीं थीं, लेकिन उन्हें भीतर तक पता था कि उनके हाथ ख़ाली हैं। सब कुछ बंद मुट्ठी से रेत की तरह फिसल चुका है। शनि का त्रास क्या होता है शायद तभी उन्होंने पहली बार जाना हो…! लेकिन शनि उनकी लाइफ में सैटर्न रिटर्न से क्या कहानी कहने जा रहे थे उसका अंदाज़ा शायद खुद दीपिका को भी नहीं था। ब्रेख्त की पंक्तियां अब भी जीवित थीं –

“जो हो चुका, सो हो चुका है

वह पानी जो तुम शराब में उंडेल चुके हो

उसे उलीच कर बाहर नहीं कर सकते

लेकिन

हर चीज़ बदलती है

अपनी हर आख़िरी सांस के साथ

तुम एक ताज़ा शुरूआत कर सकते हो…”

‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’(2013) से दीपिका ने अपनी वही ताज़ा शुरूआत की। विशाल भारद्वाज की तरह संजय लीला भंसाली ने भी इस फिल्म की कहानी का आधार बनाने के लिए शेक्सपीयर के नाटक रोमियो-जूलियट का सहारा लिया था। फिल्म में दीपिका एक तरह से जूलियट थीं… और उन्हें वह रोमियो भी इसी दौरान मिला जिसका उनके वजूद को इंतज़ार था… फिर दीपिका के सैटर्न रिटर्न में भी वह सब घटित होता चला गया जो शनि दीपिका से करवाना चाहते थे। पीकू(2015), तमाशा(2015), बाजीराव मस्तानी(2015), पद्मावत(2018), छपाक(2020) और अब 83’(2021)। दीपिका पादुकोण को अब शायद पता चल चुका है कि उनकी वह ‘अलग’ उड़ान क्या है? उम्मीद है कि वो अपने इस अलग पर कायम रहेंगी।Ranveer-Deepika

“समझिए SATURN RETURN होता क्या है”

सैटर्न रिटर्न दरअसल पाश्चात्य ज्योतिष का एक सिद्धांत है। सैटर्न रिटर्न की मान्यता के अनुसार किसी भी व्यक्ति के जीवन में 27वें से 32वें वर्ष के बीच बेहद महत्वपूर्ण घटनाएं होती हैं। जीवन में जटिलता ऐसे घुल जाती है जैसे पानी में नमक और चीनी। एक भयंकर छटपटाहट और बेचैनी पैदा होती है। इस परिस्थिति से पार पाने का एक ही तरीका है – उस X Factor की खोज, जो आपका होना तय करे। जो यह साहस जुटा लेते हैं वे पार लग जाते हैं, बाकी सब एक किस्म के अफ़सोस की परछाई से जीवन भर बचने की कोशिश करते रहते हैं।


story by Pankajj Kourav

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