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‘तारा की देवयानी सेठ से उजड़ा चमन’ तक एक निहायत ज़हीन अदाकारा

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बदलते वक्त के साथ हिंदुस्तान की इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भी खासा बदलाव आया है। कभी महाभारत और रामायण जैसे पौराणिक टीवी सीरियल की लोकप्रियता रही, तो बदलते वक्त में इनकी जगह तारा और सास-बहू जैसे डेली सोप ने ले ली। इनके पैरलल हिंदी सिनेमा भी दो धाराओं में दर्शकों का मनोरंजन करता रहा। वहीं थिएटर ने भी अपनी कला से दर्शकों के एक खास वर्ग को खुद से जोड़े रखा। दूसरे शब्दों में कहें तो समय के साथ मनोरंजन फील्ड में भी काफी विस्तार और इनोवेशन हुआ है। आज जमाना मल्टीप्लेक्स से भी आगे बढ़कर वेबसीरीज तक जा पहुंचा है। ऐसे में जब बात हो चली है इंडस्ट्री के बदलते दौर की तो एक ऐसी शख्सियत का जिक्र करना भी जरूरी हो जाता है, जो बदलाव के हर दौर का हिस्सा रही और अपने हुनर से इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की हर स्ट्रीम में अपना एक खास मुकाम बनाया।

मिलिए एक बेजोड़ कलाकार, उससे भी बेहतर खुशमिजाज इंसान ग्रुशा कपूर से

हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म उजड़ा चमन ने उम्मीद से अच्छा बिजनेस तो किया ही साथ ही दर्शकों के अलावा फिल्म क्रिटिक्स का दिल जीतने में भी कामयाब रही। फिल्म में वैसे तो सबने अपना रोल बखूबी निभाया लेकिन फिल्म के एक कैरेक्टर सुषमा कोहली यानि ग्रुशा कपूर ने अपने दमदार अभिनय से उजड़ा चमन की कामयाबी में चार चांद लगा दिए। ग्रुशा कपूर फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का एक जाना पहचाना नाम है, जिन्होंने टीवी सीरियल से लेकर फिल्म और थिएटर से लेकर वेब सीरीज तक में, हर तरह के किरदार को अपने बेहतरीन अभिनय से जिंदा कर दिया। वो जब भी स्क्रीन पर आईं देखने वालों के जेहन पर उस किरदार की यादगार छाप छोड़ गईं।

अपने हरफनमौला अंदाज के लिए जानीं जाने वाली ग्रुशा कपूर एक स्थापित एक्ट्रेस होने के साथ ही कास्टिंग डायरेक्टर और प्रोड्यूसर की भी सफल भूमिका निभा चुकी हैं। लेकिन ग्रुशा कपूर खुद को Full Time Mother, Part Time Actor और Constant Dreamer मानती हैं।

थिएटर से लेकर सीरियल और सिनेमा से वेब सीरीज तक छोड़ी अपनी छाप

बात 90 के दशक की है, जिन दिनों भारत में सेटेलाइट टीवी की शुरुआत हुई थी। उन्हीं दिनों समय से आगे की सोच पर बना एक टीवी सीरियल  “तारा” टीआरपी के सारे रिकार्ड तोड़ रहा था। इसी सीरियल में 15 साल की एक लड़की अपने कैरियर का डेब्यू करती है। महज 15 साल की उम्र में अपने एक्टिंग से हैरान कर देने वाली ये लड़की कोई और नहीं बल्कि ग्रुशा कपूर थीं। ग्रुशा कपूर ने सीरियल में दीपक सेठ (आलोक कुमार) और तारा की सौतेली बेटी देवयानी सेठ का किरदार निभाया था। शूटिंग के दौरान सेट पर इतनी कम उम्र में उनका बड़ा कांफिडेस हर किसी के लिए चौंकाने वाला एक्सपीरियंस था। जब ‘तारा’ का प्रसारण शुरू हुआ था तब केवल 52 एपिसोड बनाने की बात तय हुई थी लेकिन शो जबरदस्‍त हिट रहा और फिर लगातार पांच सालों तक इसे प्रसारित किया जाता रहा। शो के 500 एपिसोड बनाए गए थे। शो में देवयानी का किरदार बेहद पसंद किया गया और ग्रुशा कपूर को लोग देवयानी नाम से ही जानने और पुकारने लग गए।

ग्रुशा कपूर टीवी की दुनिया में अपनी एंट्री को लेकर बताती हैं कि, एक्टर राजा बुंदेला उन दिनों दिल्ली आए तो हमारे पापा से दोस्ती के नाते मिलने घर पर पहुंचे। उन्होंने पापा को बताया कि एक टीवी सीरियल में बेहद अहम रोल है जिसे उनकी बेटी यानी मैं, कर सकती हूं। मैं अभी स्कूल में पढ़ रही थी। पापा इस बात के लिए राजी हो गए और छुट्टियां लेकर मैं पहली बार मुम्बई शूटिंग के लिए गई। सीरियल के डायरेक्टर रमन कुमार थे, इनके साथ शूटिंग पूरी की। तारा की बेटी देवयानी का यह किरदार बहुत पसंद किया गया। इसके बाद मुझे कई ऑफर मिलने लगे। इस तरह में दिल्ली से मुंबई आई थी और फिर यहीं जम गई।

ग्रुशा कपूर ने एक्टिंग के साथ प्रोडक्शन फील्ड में भी अपना हाथ आजमाया। उन्होंने साल 2006 से साल 2007 तक स्टार प्लस पर प्रसारित हुए सीरियल “गोलू के गॉगल्स” को अपने पति विक्रमजीत सिंह भुल्लर के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया। इसे लेकर ग्रुशा कहती हैं कि, मैं काफी टाइम से किसी सीरियल को प्रोड्यूस करने की सोच रही थी लेकिन एक्टिंग की वजह से प्लानिंग टलती रही। लेकिन कई कहानियां सुनने के बाद मुझे गोलू की कहानी बेहद पसंद आई। पहली बात तो यह सीरियल बच्चों के लिए था और उस वक्त टीवी पर ऐसे सीरिल्यस लगभग ना के बराबर मौजूद थे। ग्रुशा आगे कहती हैं कि मैंने इस सीरियल के जरिए पहली बार प्रोडक्शन फील्ड में हाथ जरूर डाला था लेकिन प्रोडक्शन उनके लिए कभी कोई नई चीज नहीं थी। मेरे पति विक्रमजीत सिंह पहले से एक प्रोड्यूसर हैं जो कुछ फिल्म के साथ कई छोटी फिल्में बना चुके हैं। इसके अलावा दूरदर्शन के लिए स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बना चुके हैं।

टीवी और फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाने वाली ग्रुशा रियल लाइफ में भी एक मां की भूमिका बखूबी निभा रही हैं। उन्होंने अपने बेटे की परवरिश और उसे समय देने के लिए पांच सालों तक छोटे पर्दे से दूरी बना रखी और पांच साल बाद स्टार टीवी पर प्रसारित सीरियल ‘सिया के राम’ के जरिए धमाकेदार री-एंट्री की। ग्रुशा कपूर ने सीरियल में कैकेयी की भूमिका निभाई, जो बेहद चैलेंजिंग रोल था। ग्रुशा ने सिया के राम सीरियल में अपने अद्भुत अभिनय के जरिए एक बार फिर कैकेयी के किरदार को जीवंत कर दिया या फिर यूं कह लीजिए कि ग्रुशा ने असल मायने में ‘कैकेयी’ को जिया है, समझा है और महसूस किया है । उनकी एक्टिंग, संवाद, अंदाज और हर हाव-भाव में जिस तरह कैकेयी बसती है, वाकई अद्भुत है, कला की एक अलग मिसाल है।

 कैकेयी के रोल को लेकर ग्रुशा कहती हैं कि कैकेयी का रोल मुझे बेहद चैलेंजिंग लगा और इसे निभाकर मुझे संतुष्टि मिली। यह एक प्रकार से निगेटिव शेड का रोल है, फिर भी कैकेयी राम को बहुत प्यार करती है । ऐसे में इस रोल की भाषा और मनोविज्ञान समझने और प्रदर्शित करने में  काफी आनंद मिला।

सनी लियोनी की बॉयोपिक में आईं नजर

इन दिनों वेबसीरीज़ काफी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं तो ग्रुशा कपूर इससे दूर कैसे रह सकती हैं। लिहाजा उन्होंने पिछले साल आई पोर्न स्टार से बॉलीवुड स्टार बनी सनी लियोन की बायोपिक ‘करनजीत कौर: द अनटोल्‍ड स्‍टोरी ऑफ सनी लियोन’ में भी अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहीं। इस बायोपिक में उन्‍होंने सनी लियोन की मां की भूमिका निभाई थी जबकि सनी ने खुद अपना किरदार निभाया था।  ग्रुशा कपूर टीवी सीरियल के साथ-साथ कई फिल्मों में भी अपना जलवा बिखेर चुकी हैं। उजड़ा चमन के अलावा ग्रुशा ने ‘जानम समझा करो’, महायुद्ध (1998), ‘हवा’ (2003), जय हो डेमोक्रेसी’ (2015) और ‘चिंटू जी’ जैसी फिल्मों में काम किया है। हालांकि उजड़ा चमन से पहले उन्होंने ज्यादातर फिल्में अपने अपने होम प्रोडक्शन में ही की हैं। दरअसल ग्रुशा कपूर मशहूर डायरेक्टर-राइटर रंजीत कपूर की बेटी और एक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के मालिक विक्रमजीत सिंह भुल्लर की पत्नी हैं, जिन्होंने ‘जय हो डेमोक्रेसी’ फिल्म बनाई है। वो इसके सहनिर्देशक थे जबकि डायरेक्शन पापा रंजीत कपूर का था।

बालीवुड के दूसरे कपूर खानदान से रखती हैं ताल्लुक

अगर यह कहा जाए कि ग्रशा कपूर फिल्मी दुनिया के दूसरे कपूर परिवार से ताल्लुक रखती हैं तो गलत नहीं होगा, जहां सब के सब एक से बढ़ कर एक कलाकार हैं। वो मशहूर निर्देशक और राइटर रंजीत कपूर की बेटी और अन्नू कपूर की भतीजी हैं। ओम पुरी इसी परिवार से जुड़े रहे हैं। अनिल कपूर जो अब फिल्मो में अन्नू कपूर के नाम से जाने जाते हैं, ग्रुशा कपूर के सगे चाचा हैं। ग्रुशा के पिता रंजीत कपूर मध्यप्रदेश के सीहोर से तो उनकी मां उत्तरप्रदेश के लखनऊ से हैं। लिहाजा नार्थ से होने के चलते ग्रुशा कपूर की हिंदी में भी अच्‍छी पकड़ है। 

ग्रुशा कपूर अभिनय के प्रति अपने जुनून को लेकर कहती हैं कि, हमारा घर कला और संस्कृति से जुड़ा हुआ था। इस माहौल में पली बढ़ी और शौक चढ़ गया एक्टिंग का। बचपन से ही रंगमंच का ख्वाब देखकर मैंने कला की दुनिया में कदम रखा। पापा रंजीत कपूर एनएसडी में थे तो चार साल थिएटर इन एजुकेशन में लगाए और यहीं से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं।

थिएटर, टेलिविजन, सिनेमा और वेब-सीरीज, चारों ही फील्ड में अपनी खास पहचान बनाने वालीं ग्रुशा कपूर एक अच्छी कलाकार के साथ ही बेहद उम्दा और सरल इंसान है। उनका सरल व्यक्तित्व उनकी खूबी, तो पॉजिटिव एटीट्यूड उनकी ताकत है। ग्रुशा का मानना है कि बस चुपचाप,शांति और ईमानदारी से अपना काम कीजिए, अगर आपके काम में ईमानदारी है तो वो किसी भी हाल में नज़र आएगी। वहीं ग्रुशा मायानगरी में छा जाने के ख्वाब सजोने वाले आज के युवाओं को मैसेज देती हुए कहती हैं कि मुम्बई आने से पहले ट्रेनिंग लेकर आएं। क्योंकि इंडस्ट्री में पांव जमाने के लिये क्वालिटी बेहद जरूरी है और तभी अच्छे लोगों के साथ काम करने का मौका भी मिलता है।

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