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ये कहानी एक छोटे से गांव में किसान परिवार में जन्मी एक ऐसी लड़की के साहस, संघर्ष और सफलता के सफर की है, जिसने नियति को बदलते हुए अपना भाग्य खुद लिखा। तमाम चुनौतियों से लड़ते हुए खुद अपना भविष्य गढ़ा और हौंसलों के बूते अपने अरमानों का आसमां हासिल किया। आज उसके संघर्ष की कहानी उन तमाम लोगों के लिए अंधकार में रोशनी की किरण की तरह है जिनके सपने मुसीबतों के आगे हार मानकर दम तोड़ देते हैं।

मजबूत इरादों की अनसुनी कहानी

एक जिद ताकि बुनी जा सके जीवन की कविता…एक जिद ताकि सपनों की हरी पत्तियों पर ओस की बूंद सा थिरक सके मन…एक जिद ताकि मन के तार से बज सके वो संगीत जिसमें विश्वास के तानों पर गुलजार होती हो जिंदगी की गजल… जी हां जिंदगी में कुछ कर दिखाने की एक ऐसी ही जिद है उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ के फूलपुर तहसील के एक छोटे से गांव दशमढ़ा में जन्मी रोशनी यादव की। रोशनी आज सीतापुर में बतौर डिप्टी कलेक्टर पदस्थ हैं, लेकिन एक छोटे से गांव के बेहद साधारण घर में जन्म लेने के बाद छात्र राजनीति और फिर प्रशासनिक गलियों में अपना खास मुकाम बनाने तक का उनका सफर कभी इतना आसान नहीं रहा।छोटे गांव से ताल्लुक रखने के कारण पढ़ाई की अच्छी सुविधा नहीं मिली, घर की सबसे बड़ी बेटी होने के कारण शुरू से जिम्मेदारियों का बोझ, समाज के ताने सुने, मुफलिसी के तमाम रंग देखे, लेकिन कुछ भी रोशनीजी को अपने ख्वाबों तक पहुंचने से नहीं रोक सका। रोशनी का  मानना है कि हर वो आवाज, जो आपको कुछ अच्छा करने से रोके, उसे आप अपनी जीत के बाद की तालियों की तरह सुनें और जिंदगी में आगे बढ़ते रहें।

लड़की है ! क्या कर लेगी? अपनी लिमिट में रहा करो ! सिविल सर्विस निकालना तुम्हारे बस की बात नहीं ! ये कुछ ऐसे ताने हैं जो कुछ अलग कर गुजरने की चाह रखने वाली लड़कियों को अक्सर सुनने पड़ते हैं, जब वो कोई बड़ा सपना संजोती हैं। कुछ ऐसे ही ताने रोशनी यादव को भी सुनने को मिले जब उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी करने का फैसला लिया। लेकिन रोशनी यादव ने हर ताने और अपनी तरफ उठने वाली हर उंगली को चुनौती के रूप में लिया। हर मुश्किल का डंटकर सामना किया और अपनी अपनी मेहनत के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवारमें पली-बढ़ी रोशनी आज एक आत्मनिर्भर डिप्टी कलेक्टर हैं। अपने पहले ही प्रयास में एसडीएम बनकर उन्होंने पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

रास नहीं आई राजनीति की राह 

प्रशासनिक गलियों में अपनी खास पहचान बनाने वाली रोशनी छात्र राजनीति में भी हाथ आजमा चुकी हैं। दरअसल इलाहाबाद यूनवर्सिटी में कई सालों तक छात्रसंघ चुनाव पर बैन लगा रहा और जब फिर से चुनावी शंखनाद हुआ तो उभरते छात्र नेताओं में रोशनी यादवजी का नाम भी शरीक था। छात्रसंघ बहाली से लेकर छात्रों के हित के लिए रोशनी लगातार आवाज बुलंद करती रही। देखते ही देखते रोशनी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की बडी छात्रनेता के तौर पर उभरीं।

 पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी रोशनी हमेशा कुछ बड़ा करना चाहती थीं। छात्र राजनीति के सहारे वो बड़े मुकाम को हासिल करना चाहती थी। इस जिद को रोशनी ने चुनाव हारने के बाद भी खुद में पाल रखा था। वह समय के साथ बदल तो गई, लेकिन उसके आयाम नहीं बदले थे।


2013 में जब छात्रसंघ चुनाव का बिगुल बजा तो रोशनी यादव को समाजवादी छात्रसभा से अध्यक्ष पद के लिए दावेदार बनाया गया। रोशनी चुनाव तो हार गईं लेकिन हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई कर सिद्धार्थ नगर में शिक्षक बनीं।  उन्हें प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात किया गया। शिक्षक बनने के बाद भी रोशनी ने सपने देखने नहीं बंद किए और ना ही जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए मेहनत करने में पीछे रहीं। खुली आंखों से सपने देखने वाली रोशनी ने चुनाव में मिली हार के बाद अपनी जिंदगी में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सकारात्मक सोच के साथ हमेशा जिंदगी में आगे और बेहतर करने के प्रयास में जुटी रहीं। लिहाजा टीचर बनने के बाद भी रोशनी कुछ बड़ा करने की तैयारी में पूरी शिद्दत के साथ जुटी रहीं और पीसीएस-2016 में  बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुये अपने सपनों को एक नया आयाम दिया। रोशनी ने अपने पहले ही प्रयास में 27वीं रैंक हासिल कर  एसडीएम का पद अपने नाम किया।

‘न्याय की नायिका’

अपनी कार्यशैली के चलते बहुत ही कम समय में अपनी खास पहचान बनाने वाली रोशनीजी का मकसद ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सभी को न्याय दिलाना है। रोशनी यादव बताती हैं कि समाज के निचले तबके, महिलाओं और दिव्यांगों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। रोशनीजी अपनी सूरत की तरह ही सीरत की भी काफी धनी हैं। उनका सहज स्वभाव और संवेदनशीलता का हर कोई मुरीद है। बड़ी अधिकारी होने के बावजूद रोशनी इंसाफ की उम्मीद लेकर उनके पास आए लोगों से बेहद सहजता के साथ मिलती हैं और उनकी समस्याएं सुनती हैं। शायद ही अब तक कोई उनकी सुनवाई से निराश होकर लौटा हो।

रोशनीजी का मानना है कि जब तक जीवन है, तब तक संघर्ष है।  लाइफ हमेशा आसानी से नहीं गुजरती। हर दिन कोई न कोई चुनौती, कोई न कोई, संघर्ष लाइफ में आता है और आता रहेगा।

पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने के लिए टीचर से एसडीएम बनीं रोशनीजी अब आईएएस की तैयारी कर रही हैं। उनका सपना है कि वो आईएएस अधिकारी बनकर समाज में निचले तबके तक न्याय पहुंचाएं। रोशनी महिला सशक्तिकरण और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयासरत हैं। उनका कहना है कि मेरी कोशिश होगी बेटियां अपने आप को कम ना समझें, अपने हक के लिए लड़ें और आगे बढ़ें। वाकई पॉजिटिव इंडिया का सलाम है ऐसी शख्सियत को जिसने दृढ़ निश्चिय और मेहनत से पहले अपनी  जिंदगी बदली और अब उनकी कहानी हजारों लोगों की जिंदगी बदल रही है। महिलाओं और बेटियों को बुरे वक्त में चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ने का साहस दे रही है।

मुश्किलों से घबरा कर उसके सामने घुटने टेक देना कोई अक्लमंदी नहीं होती। परिस्थितियां चाहे जितनी भी खराब और आपके प्रतिकूल क्यों न हों, इंसान को अपना संघर्ष हमेशा जारी रखना चाहिए, क्योंकि हालात से लड़ना, लड़कर गिरना और फिर उठकर संभलना ही जिंदगी है। वैसे भी नसीब के भरोसे बैठने वालों को सिर्फ वही मिलता है, जो कोशिश करने वाले अक्सर छोड़ देते हैं। रोशनीजी के संघर्ष और सफलता की कहानी भी कुछ यही कहती है।

 

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1 Comments

  1. Suryabhushan tiwari April 3, 2020

    Nice channel hai

    Reply

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