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अपनी राह की मुसाफिर: डॉ. श्वेता माहेश्वरी

mayankshukla 1 year ago
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अगर कोई बचपन से ही रेड कॉरपेट पर चलने का सपना देखे और आज वो 40 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय अवार्ड से नवाजी जा चुकी हों, तो ऐसे जूनून को आप क्या कहेंगे ? जी हां हमारी आज की कहानी एक ऐसी शख्सियत की है जिन्होंने अपने दम पर सफलता के पैमाने गढ़े, जो सोचा, जो ठाना, वो किया और जुनून को अपनी ताकत बनाकर खुद के बनाए रास्ते पर चलते हुए एक खास मुकाम हासिल किया।

सपनों की कीमत और अहमियत क्या होती है, अगर आपको समझना है तो इंदौर में रहने वाली डॉ. श्वेता माहेश्वरी से बस एक बार मिल लीजिए। हालात और किस्मत का रोना भूलकर अपनी मेहनत के बूते सपनों को सच की सूरत में कैसे ढाला जाता है,आप बखूबी समझ जाएंगे। घऱ की परिस्थितियों के कारण डॉ. श्वेता की शादी कम उम्र में हो गई लेकिन उन्होंने इसे अपने सपनों में बाधा बनने का कभी ‘एक्सक्यूज’ नहीं बनने दिया और शादी के बाद खुद को साबित करने के साथ ही अपना एक मुकाम और देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई। 

लीक से हटकर अपनी पहचान बनाई डॉ. श्वेता माहेश्वरी ने

बचपन से बड़े ख्वाब बुनने वाली डॉ. श्वेता का जन्म मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में हुआ। छोटी होने के बावजूद उनके मन में हमेशा ऊंची उड़ान भरने का जुनून सवार रहता था। डॉ. श्वेता बचपन से ही रेड कॉरपेट पर चलने का सपना तो देखती थीं साथ ही घर में सबसे बड़ी होने के कारण अपनी सारी जिम्मेदारियां भी बखुबी निभाना जानती थीं। पिता ने कभी अपनी तीनों बेटियों को बेटियों जैसा नहीं रखा, शुरू से लड़को जैसी परवरिश की लिहाजा पिता के भी सपने अपनी बेटियों के लिए हमेशा से ऊंचे रहे। वो अपनी तीनों बेटियों को ऊंचे मुकाम पर देखना चाहते थे शायद इसलिये आज उनकी दो बेटियां विदेश में हैं। एक बेटी सौम्या राठी  केलिफोर्निया (USA) में है तो दूसरी बेटी डॉ. दिव्या राठी लंदन में डॉक्टर हैं।

कहते हैं कि प्रतिकूल परिस्थितियों से निकलकर सफलता तक जाने वाली हर यात्रा अलहद,अद्धभुत और अद्वितीय होती है। सवाल इस बात का नहीं होता कि आप आज क्या हैं, क्या कर रहे हैं, क्या उम्र और समय है, बस एक हौसला चाहिए। जीवन की लहरों में तरंग तभी पैदा होगी, जब आप वैसा कुछ करेंगे जैसे डॉ. श्वेता माहेश्वरी ने अपनी जिंदगी में करके दिखाया।

डॉ. श्वेता की प्रारम्भिक शिक्षा शिवपुरी में हुई, उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उनका परिवार इंदौर शिफ्ट हो गया। स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद डॉ. श्वेता अपनी लाइफ में कुछ हटकर करना चाहती थीं जो पूरे परिवार में किसी ने नही किया हो। इसके लिए उन्होनें फीजियोथेरेपी का कोर्स किया मगर इस बीच घर की कुछ परिस्थितियों के कारण कम उम्र में ही उनकी शादी हो गई लेकिन कहते हैं ना सपनों की कोई सीमा नहीं होती, तमाम तोहमतों के बावजूद हसरत कभी कम नहीं होती। अड़चनों की आंधियां और तकलीफों के तूफान को भी हुनर और हौसलों की बयार के आगे अपना रुख बदलना पड़ता है। लिहाजा डॉ श्वेता ने भी शादी के बाद ही अपनी जिंदगी में सब कुछ हासिल किया। हालांकि डॉ श्वेता कहीं न कहीं अपनी कामयाबी में अपने पति को भी बराबर का भागीदार मानती हैं क्योंकि अगर उनका सहयोग न होता तो शायद आज वो यहां न होती।सपनों की राह में डॉ. श्वेता का असली संघर्श शादी के बाद शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने MSW और BCA करने के बाद Certified Clinical Hypnotherapist में एडमिशन लिया लेकिन पूरा साल बीत जाने के बाद उन्हें पता चला कि इसका Affiliation ही नहीं थी। यहां से उनकी लड़ाई शुरू हुई, तब लड़ाई थी यूनिवर्सिटी से, कॉलेज-प्रशासन ने और आज लड़ाई है खुद की खुद से,खुद को और बेहतर साबित करने की। इसके बाद उन्होंने अमेरिकन यूनिवर्सिटी से PHD पूरी की।

उम्र के जिस दौर में जब युवा पीढ़ी जिंदगी को अपने-अपने तरीके से जी रही थी,उस समय महज 21 साल की उम्र से ही डॉ.श्वेता ने काउंसलिंग को अपना प्रोफेशन बना लिया था। पुराने पन्नों को पलटते हुए श्वेता बताती हैं, जब लोग अपनी परेशानिया लेकर आते थे और काउंसलिंग के बाद उनके चेहरे की चमक उन्हें उनकी जिंदगी का मकसद बता जाती थी। डॉ.श्वेता आज जानी-मानी माइंड बूस्टर ट्रेनर, टैरो  कार्ड रीडर, काउंसलर, कॉरपोरेट ट्रेनर और मोटिवेशनल स्पीकर हैं, इन क्षेत्रों में उनकी अपनी एक अलग और खास पहचान है।डॉ.श्वेता आज कई बड़ी नेशनल और इंटरनेशनल कंपनियों के साथ काउंसलर और ट्रेनर की भूमिका में काम कर रही हैं। इसके अलावा वो वूमन पावर सोसायटी की प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। डॉ.श्वेता आर्टिकल्स भी लिखती हैं और “जिंदगी की पहेलियों को सुलझाते ये अद्धभुत टैरो कार्ड्स” नाम से उन्होंने एक किताब भी लिखी है। उन्हें अब तक 40 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अवार्डों से नवाजा जा चुका है। 

Gold Medalist in Tarot Card Reading

Youth World Indian Icon Award

Global Pride Award

Honoured by LIC Group

Honoured by Lions Group

Rastra Prerna Award

As guest of honour in Educational Leaders Summit, Jaipur

As a guest of honour in Diamo, Diamond Achivers Award

Awarded as a Excellent Motivational Speaker

डॉ.श्वेता हमेशा से अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती थीं। वो चाहती थीं कि लोग उन्हें उनके नाम से जाने ना कि पति के नाम से और न पिता के नाम से। वो हमेशा अपने आप को रेड कॉरपेट पर देखना चाहती थीं। रेड कारपेट पर चलने के इसी जुनून ने उन्हें अंतर्ऱाष्ट्रीय कंपनियों की काउंसलर,ट्रेनर और टैरो कार्ड रीडर तक पहुंचाया।

एक खास मुकाम पर पहुंचने के बावजूद डॉ.श्वेता कहती हैं कि सफलता के पैमाने हर किसी के लिए अलग-अलग हैं। लेकिन हां अगर मैं अपनी बात करूं तो ये सिर्फ एक पड़ाव है जिंदगी का। जिंदगी में कुछ अलग हटकर करने की चाह हो तो रास्ते खुद ब खुद बनते जाते हैं बस जरूरत होती है एक अटल-सकारात्मक सोच, नेक इरादे और हर चुनौती से भिड़ने के साहस की। हालांकि इस रास्ते पर मंजिल तक का सफर इतना आसान नहीं। सच बोलूं तो मुझे यह भी नही पता कि मेरी मंजिल क्या है क्योंकि मंजिल की तो अपनी सीमाएं है और मै और मेरी काबलियत असीमित हैं। सफलता के लिए संघर्ष तो करना होगा ऐसा जरूरी नहीं है लेकिन बिना संघर्ष की जीत आपको वो खुशी और संतुष्टि शायद न दे पाए जो संघर्ष के बाद मिलती है। डॉ.श्वेता स्वभाव से जिद्दी हैं, अगर उन्होंने कोई चीज ठान ली तो उसे हर हाल में पूरा करके ही रहती हैं। उनकी ऐसी ही एक जिद थी, देशभर की अद्धभुत शख्सियतों और समाज के असली नायकों को एक मंच पर लाकर सम्मानित करने की। जिसे लेकर उन्होंने हाल ही में इंदौर की होटल लेमन ट्री में Incredible Indian Icon Award 2019  का आयोजन  किया और भारत के 18 से ज्यादा राज्यों के 90 चुनिंदा लोगों को मंच के माध्यम से सम्मानित कर एक नई मिसाल कायम की।

वाकई डॉ.श्वेता कहानी की कहानी साबित करती है कि कुछ बड़ा और अलग करने के लिए अथाह पूंजी और संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, जरूरत होती है तो सिर्फ एक नई सोच की,कुछ कर दिखाने के जुनून की,अपने खुद के संजोए सपनों को पूरा करने के पागलपन की और खुद को साबित करने की उस शिद्दत की जो आपको न सोने देती है,न रुकने देती है और न ही कभी थकने देती है।


Story by Vivek Porwal

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