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क्यों ना ग्वालियर पर गर्व हो@Surgical strike 2.0

mayankshukla 2 years ago
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भारतीय वायु सेना ने POK और पाकिस्तान स्थित आतंकियों के बंकरों को ध्वस्त कर पुलवामा आतंकी हमले का बदला ले लिया और अमन चैन के दुश्मनों की सांस छीन ली। लेकिन क्या आपको पता है पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने में मध्यप्रदेश ने भी अहम भूमिका निभाई है। ग्वालियर के एयरबेस के लड़ाकू विमानों ने दुश्मनों के बंकरों की निशानदेही की तो इस हमले में सेना ने जो बम इस्तेमाल किए वो जबलपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बने थे।

ग्वालियर से उड़ान भरने के बाद मिराज ने पाक पर बरसाए बारूद

हिंदुस्तान ने एयर स्ट्राइक के जरिए आतंकिस्तान बन चुके पाकिस्तान को धूल चटाई तो मध्यप्रदेश का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया। क्योंकि पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डों को जिन बमों से उड़ाया गया वो जबलपुर की आर्डिनेंस फैक्ट्री में बने थे, तो वहीं जिन मिराज विमानों की मदद से पड़ोसी मुल्क पर एयर स्ट्राइक की गई वो विमान भी ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरे थे। 12 विमानों ने ग्वालियर से पठानकोट एयरबेज के लिए उड़ान भरी थी और फिर पठानकोट के बाद सीधे पाक पर बारूद गिराया। ग्वालियर मिराज 2000 का एयरबेस स्टेशन है।

ग्वालियर का आसमां बना तेजस को हवा में रिफ्यूलिंग का गवाह

ग्वालियर का आसमान ही तेजस को हवा में रिफ्यूल करने का गवाह रहा है। ग्वालियर एयरबेस ऐसा करने वाला देश का एकमात्र एयरबेस है यानि अगर यहां से युद्ध के दौरान उड़ान भरने वाले किसी फाइटर जेट को फ्यूल की जरूरत पड़ी तो तुरंत दूसरा जेट हवा में जाकर ही उसे रिफ्यूल कर सकता है। पिछले दिनों भारतीय रक्षा के प्रमुख संस्थान हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड ने एयरफोर्स के साथ मिलकर यह इतिहास रचा। यहीं से भारत लड़ाकू विमान ‘तेजस’ को हवा में ही ईंधन भरकर विश्व के चुनिंदा देशों की सूची में शुमार हुआ। अब लड़ाई के दौरान हमारे लड़ाकू विमान बिना रुके दुश्मन से लड़ सकते हैं। रिफ्यूल करने के लिए उन्हें लैंड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

सितंबर 2018 को मध्य प्रदेश में ग्वालियर के आसमान में 20 हजार फीट की ऊंचाई पर भारतीय वायु सेना के रूस निर्मित एमकेआइ टैंकर विमान आइएल-78 के जरिये तेजस एलएसपी-8 विमान में 1900 किलोग्राम ईंधन भरा गया। इस दौरान तेजस की गति 270 नॉट थी।

हवा में फाइटर जेट को रिफ्यूल करने की क्षमता है ग्वालियर एयरबेस के पास

इस उपलब्धि के साथ हिंदुस्तान उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने सैन्य विमानों में एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की प्रणाली विकसित कर ली है। इस कामयाबी को पाने के बाद इंडियन एयरफोर्स के कई घंटे बचाए जा सकेंगे, क्योंकि अभी लड़ाई के दौरान फ्यूल कम होने पर तेजस को वापस लैंड करना पड़ता है और रिफ्यूल होने के बाद फिर से टेकऑफ करना पड़ता, इस प्रक्रिया में कई घंटे खराब होते हैं।

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