LOADING

Type to search

भारत में TV पत्रकारिता की बुनियाद रखने वाले प्रदीप सरदाना ने रचा अनूठा रिकार्ड

mayankshukla 2 years ago
Share

कहते हैं जर्नलिज्म एक जुनून है और जिसने इसे अपना जुनून बना लिया उसके लिए फिर खबर ही जिंदगी रह जाती है। वो खबरों में जीता है और दिनभर खबरों की दुनिया में ही खोया रहता है। लेकिन काम के प्रति इतना पैशन हर किसी के बस की बात नहीं हैं। मगर फिर भी समाजसेवा से लेकर विशुद्ध व्यवसाय और मिशन से लेकर ग्लैमर तक का सफर तय करने वाली पत्रकारिता की इस फील्ड में आज भी कई ऐसी शख्सियत मौजूद हैं, जिनके लिए उनका काम ही सब कुछ है और काम के प्रति उनका समर्पण   जर्नलिज्म की नई जनरेशन के लिए किसी मिसाल से कम नहीं हैं, । पॉजिटिव इंडिया आज आपको एक ऐसी ही अद्वितीय और अलहदा अंदाज रखने वाली शख्सियत से रूबरू कराने जा रहा है।

महज 17 साल की उम्र में देश के सबसे कम उम्र का संपादक बनने का कीर्तिमान रचने वाले सीनियर जर्नलिस्ट और मशहूर फिल्म क्रिटिक्स प्रदीप सरदाना ने 45 साल बाद फिर एक अनूठा रिकार्ड रचा है। प्रदीप सरदाना ने नेशनल न्यूज़ चैनल्स पर 4 दिन में 52 घंटे लाइव रहकर ‘इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स’ में अपना नाम दर्ज करवाया है।

सीनियर जर्नलिस्ट, फिल्म क्रिटिक्स और टीवी पेनलिस्ट प्रदीप सरदाना ने चार दिनों में सबसे अधिक समय तक टीवी चैनल्स पर लाइव रहकर प्रतिष्ठित ‘इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराया है।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की शोहरत में चार चांद लगाने वाली चांदनी यानि फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन की खबर पर प्रदीप सरदाना  25 से 28 फरवरी 2018 तक लगातार अलग-अलग चैनल्स में अपने विचार रखते रहे। वो इन चार दिंनों में सुबह 7 बजे से रात 12 बजे तक लगातार न्यूज चैनल्स पर पर लाइव मौजूद रहे।इस दौरान प्रदीप सरदाना जी ने न सिर्फ श्रीदेवी के जिंदगी के सफर और अभिनय पर अपने विचार रखे बल्कि हिंदी सिनेमा की चांदनी के साथ उनकी सुनहरी मुलाकातों की अविस्मरणीय यादें साझा कर दर्शकों के दिलों में चांदनी की एक और छाप छोड़ गए।प्रदीप सरदानाजी की पहली नौकरी का आईडी कार्ड

मशहूर कॉलमिस्ट प्रदीप सरदानाजी बीते 26 बरसों से ‘पुनर्वास’ साप्ताहिक के सम्पादक भी हैं। उन्होंने  महज 13 बरस की कच्ची उम्र में दिल्ली के तब के मशहूर साप्ताहिक ‘सेवाग्राम’ से अपने जर्नलिज्म के सफर की शुरूआत की थी। ‘सेवाग्राम’ के बाद 1978 में 17 बरस की उम्र में उन्होनें डॉ हरिवंश राय बच्चन के संरक्षण में अपना पत्र ‘पुनर्वास’ शुरू किया और हिंदुस्तान में सबसे कम उम्र के संपादक-प्रकाशक होने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

13 साल की उम्र में समाचार पत्र ‘पुनर्वास’ की शुरुआत करके, वह देश के सबसे कम उम्र के सम्पादक भी बने। इसके साथ ही टीवी पर नियमित पत्रकारिता की शुरुआत करने के लिए भी सरदाना जाने जाते हैं। उन्हें प्रतिष्ठित ‘गौरव शिरोमणि सम्मान’ से भी नवाजा जा चुका है।

कृषि पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत करने वाले प्रदीप सरदानाजी ने राजनीति, खेल, स्वास्थ्य, सिनेमा, नृत्य, संगीत, रंगमंच, धर्म, विज्ञान, शिक्षा, परिवहन, जल, संचार और पर्यटन समेत सभी विषयों पर लिखा और आज भी लिख रहे हैं। हालांकि उनकी ख्याति फिल्म समीक्षक के तौर पर ज्यादा हुई।

Tags:

You Might also Like

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *