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जख्मभरी जिंदगी को जीना सिखाती एक ‘जोकर’

mayankshukla 3 years ago
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एक मुस्कान किसी भी मुसीबत से निकलने का सबसे अच्छा तरीका माना गया है, भले ही आपकी वो मुस्कान पूरी तरह बनावटी हो।

Meet the Miss Clownette: शीतल अग्रवाल

इस मतलबी जमाने में शायद ही कोई निस्वार्थ भाव से किसी की मदद करने को तैयार हो,शायद ही कोई किसी के चेहरे पर  मुस्कान लाने की कोशिश करे और  श्याद ही कोई अपनी वेल सेटल्ड लाइफ को छोड़ कर किसी और के लिए काम करे। लेकिन इस शायद शब्द को असल कर के दिखाया है दिल्ली में रहने वाली शीतल अग्रवाल ने।

हरियाणा के हिसार से दिल्ली पहुंची शीतल अग्रवाल अपने सपनों को साथ लेकर चलती हैं। अपनी टीचिंग जॉब में एक अच्छा  मुकाम हासिल करने के बावजूद शीतल ने टीचिंग को अपनी लाइफ का गोल नहीं समझा और मेडिकल क्लाउनिंग करने का फैसला लिया। सुनने में थोड़ा अजीब जरूर है, और बहुत ही नया भी, शायद बहुत सरे लोगों को यह पागलपन भी लग सकता है लेकिन शीतल अपने इरादों को लेकर एकदम मजबूत हैं। उन्होंने कभी परवाह नहीं की समाज क्या कहेगा, बस चल पड़ी अपनी खुद की बनाई राह पर और मेडिकल क्लाउनिंग का काम शुरू कर दिया। शीतल आज भी हजारों बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने की काम बखूबी कर रही हैं।

Miss clownette: यह नाम शीतल अग्रवाल पर पूरी तरह सूट होता है

मेडिकल क्लाउनिंग का मतलब होता है क्लाउन केयर, जिसे हॉस्पिटल क्लाउनिंग के रूप में भी जाना जाता है, यह स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में एक कार्यक्रम है, जिसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित जोकरों के दौरे शामिल हैं। उन्हें आम तौर पर विदूषक डॉक्टर कहा जाता है जो कई देशों में एक ट्रेडमार्क नाम है। अस्पतालों में क्लाउनिंग को आशा और हास्य की सकारात्मक शक्ति के साथ रोगियों के मूड को सही करने में मदद करने के लिए दिखाया जाता है। हांलाकि भारत में मेडिकल क्लाउनिंग के बारे में बहुत  लोग नहीं जानते हैं, लेकिन यह एक नई अवधारणा नहीं है। यह आधुनिक चिकित्सा के जनक हिप्पोक्रेट्स के समय से है। मरीजों का इलाज करते समय उनके पास जोकर, थिएटर संगीतकार और कलाकार होते थे।शीतल ने अपनी टीचिंग की जॉब को छोड़ कर काफी रिसर्च के बाद मेडिकल क्लाउनिंग शुरू करने का फैसला लिया लेकिन शीतल को समझ नहीं आ रहा था कि वो अकेले इसकी शुरुवात कैसे करें। उसके बाद Miss clownette ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली और पोस्ट से उन्हें लगभग 30 रिस्पॉन्स मिले और उन 30 में से सिर्फ 5 ही लोग शीतल के साथ मेडिकल क्लाउनिंग की वर्कशॉप लेने पहुंचे। शीतल ने फिर भी हार नहीं मानी और मेडिकल क्लाउनिंग करना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें बहुत सी परेशानियां भी झेलनी पड़ी लेकिन कहते हैं ना उम्मीद पर तो दुनिया कायम है,इसी बात पर कायम रहते हुए शीतल ने अलग-अलग जगह जाकर क्लाउनिंग करना शुरू किया। सिर्फ हॉस्पिटल में ही नही बल्कि शीतल ने ओल्ड ऐज होम्स,अनाथ आश्राम,एनजीओ में भी जाकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी।

दुनिया और कुछ नहीं, बस एक आईने की तरह है। अगर आप इस पर गुस्सा करेंगे, तो बेशक ये भी आप पर गुस्सा करेगी ही और अगर आप इस पर मुस्कुराएंगे, तो ये भी आपको देख जरुर मुस्कुराएगी।

शीतल और उनके साथियों ने क्लाउनिंग को एक नाम दिया हैं जिसे लोग क्लाउनस्लर के नाम से जानते हैं। शीतल अग्रवाल ने बिना किसी वर्कशॉप, बिना किसी ट्रेनिंग के हॉस्पिटल्स में क्लाउनिंग करना शुरू किया और लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने एक छोटी सी पहल की। एक लड़की जो बहुत रिजर्व्ड नेचर की थी,जो ज्यादा लोगों से बात करने में हिचकती थी, उसके इस अंदाज़ को देख कर हर कोई हैरान था लेकिन शीतल अग्रवाल ने अपने आपको बिल्ड किया और हर रोज़ ज्यादा से ज्यादा चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करती रहीं। Miss clownette चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा हॉस्पिटल्स,क्लीनिक और आर्गेनाईजेशन उनसे जुड़े और वो हर दिन,हर पल किसी न किसी की लाइफ से टेंशन,स्ट्रेस और डर को दूर कर सकें।

story by neha yadav

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