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‘कल तक दुनिया नचनिया कहती थी,आज जमाना साथ नाचने को मचलता है’

mayankshukla 3 years ago
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आम तौर पर बेली डांसिंग लड़कियों का क्षेत्र माना जाता है लेकिन नए भारत का एक लड़का इस मान्यता को चुनौती दे रहा है। वो परिवार,रिश्तेदार और समाज को समझाना चाहता है लेकिन सब उसे अपनाने से डरते हैं क्योंकि वो पुरुष बेली डांसर है, भारत का पहला पुरुष बेली डांसर। 

मिलिए इंडिया के पहले पुरुष बेली डांसर ईशान हिलाल से

ये कहानी दिल्‍ली से ताल्‍लुक रखने वाले ईशान हिलाल की है। ईशान भारत के पहले पुरुष बेली डांसर हैं। अब तक वो डांस प्‍लस थ्री, हाई फीवर जैसे रियलिटी शो में हिस्‍सा ले चुके हैं। इसके अलावा ईशान स्‍टेज परफॉर्मेंस भी करते रहते हैं  साथ ही वो एक मोटिवेशनल स्‍पीकर भी हैं। 

डांस के लिए मैंने सबकुछ छोड़ दिया लेकिन लोगों की नज़र में मैं सिर्फ एक नचनिया से ज़्यादा कुछ नहीं था, जो लड़कियों की तरह स्‍कर्ट पहनता है, बिंदी लगाता है।

इशान हिलाल दिल्ली में रहते हैं, वो बेली डांसर हैं, कथक नृत्य जानते हैं , फ़ैशन डिज़ाइनर हैं और पेंटर भी हैं। बेबाक ईशान के लिए अपने मन की करना कोई आसान बात नहीं। इशान बताते हैं, डांस के ज़रिए मैं अपने जज़्बात व्यक्त करता हूं, जब मैं दुखी होता हूं तो नाचता हूं, जब मैं खुश होता हूं तो नाचता हूँ। डिज़ाइनिंग और नाच के ज़रिए मैं अपनी बात सामने रखता हूं। सुनिए ईशान की पूरी कहानी उन्हीं की जुबानी…जब मैं 9वीं कक्षा में था तबसे कत्थक सीखना शुरू किया। बचपन में माधुरी दीक्षित को देख डांस करने का शौक हुआ और माधुरी से प्रेरित होकर कत्थक सीखना शुरू किया,यहां तक कि मैं अपने ट्यूशन की फीस भी कभी कभी कत्थक क्लास में दे आता और बंक करता।

ईशान आगे कहते हैं कि सबसे ज्‍यादा बुरा आपको तब लगता है, जब आपके अपने आपका साथ नहीं देते। उस वक्‍त आप अंदर तक हिल जाते हैं फिर समझ नहीं आता है कि अब आप कहां जाए। मेरे साथ भी उस वक्‍त कुछ ऐसा ही हो रहा था। मेरे मम्‍मी-पापा और भाई सबने मुझसे मुंह मोड़ लिया था। दोस्‍त और रिश्‍तेदार सबने मुझसे किनारा कर लिया था। उस वक्‍त मेरे दिल और दिमाग काम ने काम करना बंद कर दिया था। अलग- थलग पड़ चुका था। छुप- छुप कर रोता था, समझ नहीं पाता था कि आखिर ऐसा मैंने किया क्‍या है? डांस ही तो करता था, नाचना कोई अपराध तो नहीं था ना?

मगर बावजूद इसके मैंने अपने पैशन को नहीं छोड़ा। स्‍कूल के दिनों में एनुअल फंक्‍शन में मेरे परफॉर्म करने की बात जब पापा को पता चली तो उन्‍होंने मेरी इस कदर पिटाई की थी कि मेरे पैर में फ्रैक्‍चर तक हो गया था, मगर ऐसा पहली बार नहीं हुआ था और न ही ये आखिरी था। इसके बाद भी कई बार ये सिलसिला जारी रहा, जब मेरे नाचने पर पापा ने मेरी पिटाई की। मैंने उन्‍हें कई बार समझाने की कोशिश की। मुझे डांस में दिलचस्‍पी है,बतौर प्रोफेशनल इसमें आगे बढ़ना चाहता हूं लेकिन उन्‍होंने कुछ भी कहने और सुनने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि नाचना-गाना हमारा काम नहीं है। मनोरंजन करना किसी और का काम है। हमारे खानदान में कभी किसी ने कुछ ऐसा नहीं किया तो तुम ‘नचनिया’ क्‍यों बनना चाहते हो?

काफी देर तक समझाने की कोशिश की मगर मेरे हर जतन बेकार थे। इसलिए मैं बस चुप ही रहा लेकिन मैंने डांस करना और देखना नहीं छोड़ा था। घर में छिप-छिप कर मैं नूतन, माधुरी और बैजंतीमाला के डांस स्‍टेप्‍स को फॉलो करता था। स्‍कूल से निकलने के बाद मैंने कत्‍थक स्‍कूल में एडमिशन ले लिया था। घर से छिपकर मैं कत्‍थक सीखने लगा। कत्‍थक सीखते-सीखते मुझे बैली डांस में दिलचस्‍पी जाग गई। यहां से मेरे बैली डांस की जर्नी शुरू हो गई।

इसके बाद घर वालों से छिपकर मैंने दिल्‍ली के ‘बंजारा स्कूल ऑफ डांन्स’ में एडमिशन लिया। यहां से बेली डांस सीखने के बाद पहली बार मुझे चीन में एक डांस कॉम्‍पीटिशन में हिस्‍सा लेने का मौका मिला। कुछ महीने सीखने के बावजूद ही मैं सेकेंड रनर अप रहा और मेरी जीत की कवरेज नेशनल ही नहीं बल्‍कि इंटरनेशनल मीडिया तक हुई। वैसे तो ये बेहद खुशी की बात थी लेकिन मेरे लिए ये सबसे ज्‍यादा तकलीफ देने वाली बात थी, क्‍योंकि एक बार फिर मेरे अब्‍बा को पता चल गया था कि मैंने डांस नहीं छोड़ा था। अखबार में मेरी फोटो देखने के बाद तो पापा आग बबूला हो गए और उन्‍होंने मम्‍मी से पूछा कि, ये क्‍या कर रहा है? इसने हमारी नाक कटवा दी पूरे समाज के सामने, ‘नचनिया’ बना फिरता है।

इशान बताते हैं, बचपन में तो मुझे किसी ने ज़्यादा रोका नहीं लेकिन मैं जैसे बड़ा हुआ मेरे परिवार वालों ने कहा की नाचना ‘हराम’ है। मेरे घरवालों ने रोकने की कोशिश की। मेरी मां ने एक मौलाना से पूछ कर एक काला धागा भी बांधा लेकिन मुझे नाचना पसंद है। मुझे बोला गया कि नाचना तो लड़कियों का काम है और इससे आपकी मर्दानगी पर सवाल उठेगा।


मेरे दोस्‍त मुझे ताने देते, कहते कि देखो इनका लड़का स्‍कर्ट पहनता है, बिंदी लगाता है, लड़कियों की तरह कमर मटकाता हुआ घूमता- फिरता है। इस्‍लाम में ये सब हराम है। पापा से ये सब सुनने के बाद पूरी दुनिया में जीतने के बावजूद मैं हार चुका था। मुझे बताया जा रहा था कि हमारे धर्म में नाचना-गाना हराम है। मगर मैं कोई गलत काम नहीं कर रहा था तो ये हराम कैसे हो सकता है? मैं किसी का खून नहीं कर रहा है, मैं कोई चोरी नहीं कर रहा, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहा था तो फिर ये गलत कैसे हो सकता है? मैं अब अंदर से टूट रहा था लेकिन कहीं न कहीं  मेरा काम लोगों की नजरों  में आ रहा था। एक-एक करके मुझे शोज के ऑफर आने लगे थे। मैं कई डांस शोज में हिस्‍सा लिया। ‘डांस प्‍लस 3’, ‘हाई फीवर’ शोज में पहुंचा। यहां मैंने कई बेहतरीन परफॉर्मेंस दीं, कई सेलिब्रेटीज के साथ मुझे डांस करने का मौका मिला। इनमें कल्‍कि कोएचलीन से लेकर रेमो डिसूजा, शक्‍ति मोहन, धर्मेश जैसी कई डांसर थीं। इसके बाद तो जैसे लोगों का नजरिया ही बदल गया।कल तक जो लोग मुझे ‘नचनिया’ कहते थे,आज उनके बच्‍चे मेरे घर आकर मुझसे सेल्‍फी मांगते हैं। पापा से कहते हैं कि मुझे ईशान के साथ फोटोग्राफ लेनी है। कल मुझे लड़कियों जैसी कमर मटकाने वाला बोलने वाले आज मुझसे डांस सीखना चाहते हैं। कल तक मेरी संगत से अपने बच्‍चों को दूर करने वाले आज मुझ जैसा अपने बच्‍चों को बनाना चाहते हैं। ये सब देखकर अच्‍छा लगता है। खुशी होती है कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन लोगों की सोच बदल रही है। अब लोग डांस को नाचना-गाने वाले की तरह नहीं बल्‍कि एक कलाकार देख  रहे हैं।

इशान बताते हैं कि जब से मीडिया में उनके बारे मे खबरें आई हैं तबसे नकारात्मक और सकारात्मक, हर किस्म की प्रतिक्रिया आई है। कुछ लोग कहते हैं कि मेरी वजह से वो अपने बच्चों की पीड़ा को समझ पायें हैं और कुछ युवा मुझे कहते हैं कि मुझ से प्रेरित होकर उन्होंने बेबाक अपने दिल की सुनी और अपने आस पास वालों के सामने अपने मन की बात कही। 

मैं बस इतना कहूंगा कि समाज हमसे है। पहले मुझे अपने आप को अपनाना होगा, फिर मेरे परिवार वालों को और फिर समाज अपने आप मानेगा। लेकिन दूसरों के सामने मैं गिड़गि़ड़ाउंगा नहीं कि मुझे अपनाओ। मैं किसी और की वजह से ख़ुद को बदलकर नहीं जीना चाहता। एक ही ज़िंदगी है और उसे अपने ढंग से जीना है। जो लोग बेली डांस को बुरा मानते हैं , मैं कहता हूं कि आप इसे जिस्म के नज़रिए से मत देखो, इसका भी एक इतिहास है।


 

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