LOADING

Type to search

Share

यह कहानी है अपने पहाड़ से हौंसले के बूते मिसेज वर्ल्डवाइड 2018 का खिताब जीतने वाली मंदीप कौर संधू की। उनके अदम्य साहस की। एक हादसे में वो अपने पति को खो चुकी थीं। गोद में दो माह का बच्चा और बड़ी जिम्मेदारी थी। किसी ने कहा, अब किसके सहारे कटेगा पहाड़ सा जीवन। कैसे मुश्किलों का सामना करेगी बेचारी, लेकिन मंदीप के लिए तो जिंदगी जीतने का नाम थी। लिहाजा उसने जवाब दिया,’फौजी की बेटी हूं किसी हाल में हार नहीं मानूंगी’

जिंदगी को उम्मीद देती मंदीप कौर की कहानी

पति की मौत के 12 साल बाद बीते 15 दिसंबर में अमेरिका के न्यूजर्सी में मिसेज वर्ल्डवाइड-2018 का खिताब अपने नाम करने वाली मंदीप ने न केवल खुद को संभाला, बल्कि अपने बेटे के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। यमुनानगर, हरियाणा के छोटे से गांव चाऊवाला की बेटी मंदीप ने योग का रास्ता अपनाया। पहले खुद योग सीखा और फिर जिंदगी के गुजर-बसर के लिए योग प्रशिक्षण केंद्र खोला। देखते ही देखते जिंदगी एक बार फिर पटरी पर लौट आई। पिछले दिनों मंदीप को जब पता चला कि अमेरिका में मिसेज वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता हो रही है तो वहां अपना नाम दर्ज करा दिया। हर राउंड में आगे रहीं और आखिरकार ताज भी पहना।

अपने साहस और संघर्ष के दम पर मंदीप ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हुईं। 

मंदीप को बचपन से खेलों में रुचि थी। 10वीं कक्षा कस्बे के सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पास की। हिंदू गर्ल्स कॉलेज में बीएससी स्पोर्ट्स में एडमिशन लेकर खेलों में भाग लिया। 

मंदीप की शादी साल 2005 में नगला जागीर गांव में हुई। 2006 में उन्होंने बेटे को जन्म दिया। पति कनाडा में काम करते थे। सड़क हादसे में उनका देहांत हो गया। इसके बाद ससुराल में नहीं रह पाईं। मायके लौट आईं। बेटे को ससुराल वालों ने ही रख लिया था। लिहाजा बेटे की कस्टडी के लिए कोर्ट में केस दायर किया। फैसला हक में आया। बेटा उनके पास आ गया। 2010 में अपनी बहन के पास मुंबई गईं और नौकरी करने की ठानी। योग की ट्रेनिंग ली और बेहतर अभ्यास के बाद योग प्रशिक्षण केंद्र खोला। बेटा हरगुण अब सातवीं कक्षा में पढ़ता है। 

कहते हैं प्रतिकूल परिस्थितियों से निकलकर सफलता तक जाने वाली हर यात्रा अनोखी और अद्वितीय होती है। सवाल इस बात का नहीं होता कि आप आज क्या हैं, क्या कर रहे हैं, क्या उम्र और समय है। बस एक हौंसला चाहिए। जीवन की लहरों में तरंग तभी पैदा होगी, जब आप वैसा कुछ करेंगे।

Tags:

You Might also Like

Leave a Reply

%d bloggers like this: