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स्केटिंग की ये दास्तां आपके दिल में उतर जाएगी

mayankshukla 3 years ago
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जिंदगी में हर कोई सिर्फ अपने बारे में सोंचता है और अपनी ही जरूरतों को पूरा करने में पूरी जिंदगी उलझा रहता है। ना तो कोई दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के बारे में सोचता है और ना ही किसी की मदद के लिए कोई अपनी व्यस्त जिंदगी से थोड़ा समय निकालने की कोशिश करता है। ऐसे में अगर कोई शख्स दूसरों की मदद के लिए महीनों जुटा रहे और हजारों किलोमीटर का मुश्किल सफर तक तय करे, तो शायद आज के जमाने में उसे फरिश्ता ही कहा जाएगा। मेरी ये कहानी भी जरूरतमंदो की मदद को अपना मजहब मानने वाले ऐसी ही एक अद्भुत शख्सियत की है।

मिलिए 25 हजार गरीब लड़कियों की शिक्षा के लिए स्केटिंग के खास मिशन पर निकले राणा उप्पलापति से

पेशे से बिजनेसमैन और इंटरनेशनल स्केटर 37 साल के राणा उप्पलापति ने देश में बेटियों की शिक्षा के लिए एक बड़े अभियान को अंजाम तक पहुंचाया है। विशाखापट्टनम के रहने वाले राणा 25 हजार गरीब लड़कियों की एजुकेशन में सुधार लाने और पैसे जुटाने के मकसद से  6 हजार किलोमीटर की स्केटिंग की यात्रा पर निकले। इस दौरान उनका कारवां भारत के 20 मुख्य शहरों से होकर गुजरा, जिसमें 4 मेट्रो सिटी भी शामिल हैं। 90 दिन की इस स्केटिंग ट्रिप के जरिए राणा ने 9 करोड़ का फंड जुटाने का लक्ष्य रखा।

राणा ने 5 सितम्बर 2018 को बेंगलुरु के होसुर से अपनी यात्रा शुरू की और हुबली, बेलगांव होते हुए महाराष्ट्र के कोल्हापुर, पुणे और मुम्बई पहुंचे। फिर वो गुजरात में भरूच और बड़ोदरा होते हुए जयपुर और फिर दिल्ली पहुंचे। राणा ने 10 दिन में ही 800 किमी की यात्रा पूरी कर लगभग 6 हजार लड़कियों की शिक्षा के लिए पूंजी जुटा ली थी। इसके बाद वो स्केटिंग के जरिए लोगों के बीच गर्ल एजुकेशन की अलख जगाते हुए दिल्ली से लखनऊ, वाराणसी, पटना, जमशेदपुर और कोलकाता होते हुए वापस होसूर पहुंचे।6 साल के बेटे के पिता राणा बताते हैं कि वो शुरू से ही आशावादी रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि गर्ल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए उन्हें किस बात ने मोटिवेट किया। इस पर वो कहते हैं, ‘अगर एक लड़की शिक्षित है तो पूरी पीढ़ी शिक्षित होगी। शिक्षा का अभाव सिर्फ करियर में ही बाधा नहीं पहुंचाता, बल्कि अगर एक लड़की अशिक्षित है तो वह स्वास्थ्य और सफाई के मुद्दे के बारे में नहीं जान सकेगी।’

टाइटन कंपनी के बिजनेस एसोसिएट राणा ने अपनी 90 दिनों की यात्रा के दौरान न सिर्फ 25 हजार लड़कियों की शिक्षा के लिए पूंजी जुटाने का काम किया बल्कि इस दौरान उन्होंने छह लाख से ज्यादा बच्चों के बीच सुरक्षा से जुड़े विषयों, खासतौर पर ‘गुड टच, बैड टच’ पर जागरुकता भी फैलाई।

अपने सफर के बारे में राणा बताते हैं कि बेंगलुरु से पुणे तक का रूट स्केटिंग के लिए थोड़ा मुश्किल था। घाटों पर मैंने 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चढ़ाई की लेकिन ढलान पर स्पीड तेज (60 किमी प्रति घंटा) हो गई।उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी 25 हजार गरीब लड़कियों की शिक्षा के लिए टाइटन ‘ईको’ (एजुकेट टू कैरी हर ऑनवर्ड्स) मिशन पर निकले स्केटर राणा उपालापत्ती के प्रयासों की जमकर सराहना कर चुके हैं। अपने अभियान के दौरान दिल्ली पहुंचे राणा ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की, जिसके बाद उपराष्ट्रपति ने ट्वीट करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की और देशवासियों से इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील भी की। वैंकेया नायडू ने अपने ट्वीट में लिखा “आज राणा उपालापत्ती से मिला, जो हजारों गरीब बच्चियों को शिक्षा मुहैया कराने के महान प्रयास के तहत स्केटिंग करते हुए 6000 किलोमीटर की यात्रा पर हैं। वो एक महान काम कर रहे हैं और इनके इस शानदार सामाजिक पहल को समाज के सभी वर्गो द्वारा सराहा जाना चाहिए।इस धरती पर चंद लोग ही ऐसे हैं जो देश या दूसरों की समस्या के बारे में सिर्फ सोंचते ही नहीं बल्कि इस दिशा में अपने जुनून से कुछ करके भी दिखाते हैं। उनके हाथ हमेशा दूसरों की मदद के लिए उठते हैं। वो दूसरों के दर्द का अपना दर्द समझते हैं और अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत के नाम कर देते हैं। विशाखापट्टनम में रहने वाले राणा उप्पलापति भी इन्हीं में से एक हैं।

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