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हिंदुस्तान में ‘दूध की नदियां’ बहाने वाले शख्स की भूली-बिसरी कहानी

mayankshukla 2 years ago
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ये कहानी भुखमरी से परेशान भारत को दुनिया का सर्वाधिक दूध उत्पादक देश बनाने वाले महान शख्स की है। श्वेत क्रांति के जनक माने जाने वाले इस शख्स ने देश को सहकारी दुग्ध उद्योग का एक मॉडल दिया। अपनी सोच से उन्होंने दिखा दिया कि एक छोटे किसान पर भी भरोसा किया जाए तो वह किस तरह चीजों को बदल सकता है। 

‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर डॉ. वर्गीज कुरियन का जन्म केरल के एक छोटे से गांव कोझिकोड में 26 नवंबर साल 1921 में  हुआ था। लेकिन, उनकी एक पॉजिटिव सोच ने दूध के क्षेत्र में दुनिया में एक क्रांति ला दी।भैंस के दूध से पाउडर बनाने वाले कुरियन दुनिया के पहले व्यक्ति थे। इससे पहले गाय के दूध से पाउडर का निर्माण किया जाता था।

आजाद भारत को श्वेत क्रांति की राह दिखाने वाले डॉ. वर्गीज कुरियन ने मध्य गुजरात के आणंद में आकर एक छोटे से गैराज से अमूल की शुरुआत कर सहकारी साम्राज्य की स्थापना की।

साधारण परिवार में पैदा हुए वर्गीज कुरियन ने चेन्नई के लोयोला कॉलेज से ग्रेजुएशन और जीसी कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर स्थित टिस्को में काम करना शुरू कर दिया। इस बीच भारत सरकार ने उन्हें डेयरी इंजीनियरिंग में पढ़ाई करने के लिए स्कॉलरशिप दिया।

अमेरिका से लौटने के बाद गैराज में शुरू किया अमूल

बेंगलुरू के इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हजबेंड्री एंड डेयरिंग में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कुरियन अमेरिका गए जहां उन्होंने मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी से 1948 में मेकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री हासिल की, जिसमें डेयरी इंजीनियरिंग भी एक विषय था। भारत लौटने पर कुरियन को अपने बांड की अवधि की सेवा पूरी करने के लिए गुजरात के आणंद स्थित सरकारी क्रीमरी में काम करने का मौका मिला।

आजाद भारत को श्वेत क्रांति की राह दिखाने वाले डॉ. वर्गीज कुरियन ने मध्य गुजरात के आणद में आकर एक छोटे से गैराज से अमूल की शुरुआत कर सहकारी साम्राज्य की स्थापना की। अपने साथी त्रिभुवन भाई पटेल के इसी गैराज में उन्होंने अपने जीवन के कई साल गुजारे थे। डॉ. कुरियन 13 मई 1949 को आणद आ गए थे। ईसाई समुदाय से होने और मांसाहारी होने के चलते उन्हें यहां किसी ने अपना घर किराए पर नहीं दिया। लिहाजा, उन्होंने 1949 में कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के अध्यक्ष त्रिभुवन दास पटेल के अनुरोध पर डेयरी का काम संभाला। उस समय डेयरी उद्योग पर निजी लोगों का कब्जा था। सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इस डेयरी की स्थापना की गई थी। बाद में पटेल ने कुरियन को एक डेयरी प्रसंस्करण उद्योग बनाने में मदद करने के लिए कहा जहां से ‘अमूल’ का जन्म हुआ।

अमूल के सहकारी मॉडल को सफलता मिली और पूरे गुजरात में इसे देखा जाने लगा। बाद में अलग अलग दुग्ध संघों को गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) के बैनर तले एक जगह लाया गया। कुरियन ने सहकारिता के माध्यम से भारतीय किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में अपना कॅरियर समर्पित कर दिया और 1973 से 2006 तक जीसीएमएमएफ की सेवा की। उन्होंने 1979 से 2006 तक ग्रामीण प्रबंधन संस्थान (आईआरएमए) में भी काम किया।आणंद में कुरियन के काम करने के दौरान भारतीय दुग्ध उद्योग की दिशा और दशा ही बदल गई। गुजरात में पहले दुग्ध सहकारी संघ की शुरूआत 1946 में की गई थी जब दो गांवों की समितियां इसकी सदस्य बनीं। सदस्य समितियों की संख्या आज 16,100 हो गयी है जिसमें 32 लाख सदस्य दूध की आपूर्ति कर रहे हैं। भैंस के दूध से पहली बार पाउडर बनाने का श्रेय भी कुरियन को जाता है। उनके प्रयासों से ही दुनिया में पहली बार गाय के दूध से पाउडर बनाया गया।

जब भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश 

अमूल की सफलता से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया। जिसके बाद पूरे देश में अमूल मॉडल को समझा और अपनाया गया। कुरियन को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। एनडीडीबी ने 1970 में ‘ऑपरेशन फ्लड’ की शुरूआत की जिससे भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया।

कुरियन ने 1965 से 1998 तक 33 साल एनडीडीबी के अध्यक्ष के तौर पर सेवाएं दीं। 60 के दशक में भारत में दूध की खपत जहां दो करोड़ टन थी वहीं 2011 में यह 12.2 करोड़ टन पहुंच गई। कुरियन के निजी जीवन से जुड़ी एक रोचक और दिलचस्प बात यह है कि देश में ‘श्वेत क्रांति’ लाने वाला और ‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर यह शख्स खुद कभी दूध नहीं पीता था। वर्गीज कुरियन और श्याम बेनेगल ने मिलकर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म मंथन की कहानी भी लिखी है जिसे करीब 5 लाख किसानों ने वित्तीय सहायता दी। विश्व बैंक ने गरीबी उन्मूलन के लिए अमूल मॉडल को चिन्हित किया है। अमूल मॉडल को व्यापक और लोकप्रिय बनाने में वर्गीज़ की बड़ी भूमिका रही है। ‘अमूल’ के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वयं जवाहर लाल नेहरू इसके उद्घाटन के अवसर पर आए थे। 

कुरियन को भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। इसके साथ ही रैमन मैग्सेसे पुरस्कार, कार्नेगी वटलर शांति पुरस्कार और अमेरिका के इंटरनेशनल पर्सन ऑफ द ईयर सम्मान से भी वो नवाए गए थे।

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