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जिन्हें RISK से ISHQ है, ये जमाना उन्हीं का है

mayankshukla 4 years ago
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जी हां…ये जमाना उन्हीं का है जिनके अंदर कुछ नया करने की आग है, अपना अलग रास्ता बनाने की तड़प है, अकेले लड़ने का साहस है, खुद को नए सिरे से साबित करने की भूख है, रिश्क लेने का जुनून है और जिंदगी का सिर्फ एक ही फितूर है ” जो सोच लिया उसे हर हाल में सच साबित करके दिखाना है, संघर्ष कितना भी कठिन हो, रास्ता कितना भी लंबा हो, कोई साथ हो या न हो, दिन हो या रात हो,हालात अच्छे हो या खराब हो,जो करना है वो करके ही दिखाना है। “

जिंदगी में जोखिम उठाना भी एक हुनर है, जो सबके पास नहीं होता। लेकिन सच यही है जो डर से जीतने का दम रखता है, कामयाबी की डगर पर वही चलता है। रिस्क शब्द को आम तौर पर थोड़े नेगेटिव सेंस में लिया जाता है लेकिन रिस्क का एक पॉजिटिव पहलू भी है। यह एक बड़ी जीत हासिल करने का मौका देता है।

याद है साल 2007 के T-20 वर्ल्ड कप का वो फाइनल मैच, जब धोनी ने अपनी करियर का सबसे बड़ा रिस्क लेते हुए फाइनल ओवर किसी एक्सपीरिंयस बॉलर्स को देने की बजाए जोगिंदर सिंह को चुना। यकीनन ये बेहद रिस्की फैसला था लेकिन उसी रिस्क ने इतिहास रचा। आज जिंदगी भी उसी T-20 मैच की तरह हो गई है। जहां डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप के जमाने में जोखिम उठाना जिंदगी और बिजनेस का हिस्सा बन गया है। आज खेल उनका है, जो जानते हैं कि रिस्क को कैसे मैनेज किया जा सकता है। इसलिए आप भी अपने अंदर की बेचैनी को समझिए, खुद को पहचानिए, जिंदगी का एक मकसद बनाइए और निकल पड़िए इस मकसद को मंजिल तक पहुंचाने के सफर में। बेशक इस सफर में तमाम मुश्किलें आएंगी, लेकिन जिस दिन आप अपने खुद के बनाए रास्ते पर चलकर, खुद के संघर्ष के दम पर कामयाबी हासिल करेंगे, उस दिन आपकी कामयाबी का किस्सा सारा जमाना सुनेगा भी और दूसरों को सुनाएगा भी।

किस्मत की बजाए मकसद को अहमियत दीजिए,वर्तमान का उत्सव मनाइए और अगले आनंद के लिए आगे बढ़ते जाइए, यही तो जिंदगी है।


ARTICLE BY MAYANK SHUKLA

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