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मिलिए उनसे ‘जिन्होनें जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल’ को बनाया अपना प्रोफेशन

mayankshukla 4 years ago
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किसी भी महिला के लिए मातृत्व उनके जीवन के सबसे बेहतरीन अनुभवों में से एक होता है। वो पल जो 9 महीनों की पीड़ा के बाद उनके जीवन में एक नई खुशियां लेकर आता है, वो पल जो किसी के जीवन में नया चिराग़ बनकर आता है, वो पल जो एक मां को उसके जीने का मकसद दे जाता है, वो पल जो दुनिया के हर शख्स के जीवन में खुशियों का संचार करता है। इस अनमोल पल को शायद दुनिया की हर मां हमेशा के लिए संजोकर रखना चाहेगी। ऐसे में अगर मां-बेटे के इसी पावन रिश्ते को तस्वीरों में कैद कर, घरों की दीवारों पर लटकाकर, यादों के किसी कोने में सहेज लिया जाए तो भला क्या बुराई है। 

मातृत्व किसी भी महिला के लिए पूर्णता का एहसास कराने वाला एक अनमोल अनुभव  है। हर मां अपने जीवन के इस  यादगार लम्हे को सहेज कर रखना चाहती है लेकिन भारत जैसे देश में बर्थ फोटोग्राफी को लेकर अलग-अलग परिवेश में रचा-बसा हमारा समाज अभी तक सहजता की स्थिति में नहीं पहुंच सका है या फिर यूं कहें कि गर्भावस्था के नितांत निजी क्षण में महिलाएं  किसी फोटोग्राफर के सामने आज भी सहज महसूस नहीं कर पाती हैं, और न ही हमारा सामाजिक परिवेश ऐसी अवस्था में उनकी फोटोग्राफी करवाने का पक्षधर रहा है।

दिल्ली में जन्मी 28 साल की उर्शिता सैनी कई बंदिशों को तोड़कर बर्थ फोटोग्राफी की राह पर चल पड़ी हैं। उर्शिता ने मातृत्व के विभिन्न अवस्थाओं की सुंदर तस्वीरों को कैमरे में उतारकर अपना एक नया मुकाम हासिल किया है। आत्मविश्वास से लबरेज उर्शिता ने पुरानी मानसिकता को पीछे छोड़कर एक नई सोच के साथ आगे बढ़ने का जो रास्ता चुना है, आज वो एक उदाहरण है सबके लिए।

1991 में अंतर्राष्ट्रीय सेलेब्रिटी डेमी मूर ने पहली बार 7 माह की गर्भावस्था में अपना फोटो शूट करवा कर सनसनी मचा दी थी। और उसके बाद से ही दुनिया भर की महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान खुद का कलात्मक फोटो-शूट करवाने का चलन जोर पकड़ गया। लगभग दो दशक बाद भारत में भी इस विधा ने जोर पकड़ा। हालांकि भारत में ये ट्रेंड सिर्फ मेट्रो सिटीज तक ही सीमित है।

हालांकि उर्शिता का सफर इतना आसान नहीं रहा, शुरूआती दौर में उन्हें भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उर्शिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि वो लोगों को  कनवेंस कैसे करे। ऊपर से उनका खुद का परिवार भी दुविधा में था कि उर्शिता को यह काम करने दिया जाए या नहीं। लेकिन उन्होंने जब अपने भतीजे के जन्म की तस्वीरें अपने कैमरे में बेहद खूबसूरत अंदाज में कैद कीं तो सारी आशंकाएं खुद ब खुद छंट गई और उनके द्वारा क्लिक की गई तस्वीरें उस खास पल की अहमियत और उर्शिता के काम की जरूरत बड़ी खामोशी से सबको समझा गईं।

इन फोटोग्राफ्स का मकसद दुनिया की नज़रों में जन्म देने की प्रक्रिया के बारे में नई और सकारात्मक सोच पैदा करना है: Editor Pozitive India

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