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मिलिए चेन्नई में ‘चलती ट्रेन के रजनीकांत’ से

mayankshukla 4 years ago
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घड़ी का कांटा रात के 12 बजने की ओर इशारा कर रहा था। वेल्लाचारी से चेन्नई रूट पर चलने वाली आखिरी गाड़ी पटरियों पर पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी। तभी पास के एक कोच से अचानक किसी महिला के चीखने की आवाज आती है, जिसे सुनकर दूसरे बोगी में बैठा आरपीएफ का एक कॉन्स्टेबल हरकत में आता है। मगर ट्रेन के दोनों डिब्बों के बीच कोई गलियारा नहीं था, अगला स्टापेज भी काफी दूर था। लिहाजा कॉन्स्टेबल के पास लड़की को बचाने के लिए चलती ट्रेन में ही एक कोच से दूसरे कोच छलांग लगाने के अलावा कोई और चारा नहीं था। आखिरकार उस कॉन्स्टेबल ने रजनीकांत की तरह जान पर खेलकर अपना फर्ज निभाते हुए जता दिया कि कर्तव्य से बढ़कर कुछ भी नहीं होता।

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के एक कॉन्स्टेबल की बहादुरी की वजह से एक महिला की इज्जत तार-तार होने से बच गई। रेलवे के इस जांबाज जवान का नाम शिवाजी है जो नाइट पेट्रोलिंग स्टाफ का हिस्सा हैं। 

शिवाजी हर रोज की तरह सब इंस्पेक्टर एस सुभाष के साथ वेल्लाचेरी से चेन्नई बीच जाने वाली ट्रेन में ड्यूटी कर रहे थे। इसी ट्रेन के महिला डिब्बे में एक 25 वर्षीय युवती भी वेलाचेरी से बीच रोड तक सफर कर रही थी। चूंकि रात का वक्त था इसलिए लेडीज कोच में उस युवती के सिवाए उस दिन कोई और महिला यात्री नहीं थी। रात करीब 11.45 मिनट पर गाड़ी चिंताद्रीपेट स्टेशन से जैसे ही आगे बढ़ती है, महिला कोच से किसी के चीखने की आवाज आती है। जिसे सुन शिवाजी चौकन्ने हो जाते हैं और उस डिब्बे की तरफ जाने की कोशिश करते हैं। लेकिन ट्रेन के डिब्बे अंदर से जुड़े हुए नहीं थे और अगला हाल्ट पार्क टाउन आने में वक्त था। शिवाजी को इस बात की चिंता थी कि कहीं अगले स्टेशन के इंतजार में कुछ अर्नथ न हो जाए।

दिमाग में चल रही उथल पुथल के बीच शिवाजी ट्रेन के धीमे होने तक रुकने की बजाए चलती ट्रेन में एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे के गेट तक छलांग लगाने का फैसला लेते हैं। किस्मत शिवाजी का साथ देती है और वो इस खतरनाक स्टंट के जरिए उस कोच तक पहुंचने में सफल होते हैं जहां से लड़की के चीखने की आवाज आ रही थी।

महिला कोच में पहुंचते ही शिवाजी देखते हैं कि युवती बेहोश पड़ी है, उसके कपड़े फटे हुए हैं, होठ से खून आ रहा है और एक शराबी उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश कर रहा है। वो अकेले ही उस बदमाश से भिड़ जाते हैं और लड़की को बचा लेते हैं। तब तक ट्रेन दूसरे स्टेशन पर पहुंच जाती है और आरपीएफ की टीम आरोपी को आकर दबोच लेती है। पीड़ित की हालत को देखते हुए फौरन एंबुलेंस को बुलाकर अस्पताल पहुंचाया जाता है। 

शिवाजी की बहादुरी के लिए जीआरपी प्रमुख ने 5 हजार का नगद पुरुस्कार प्रदान किया है। वहीं रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी आंतरिक अनुशंसा मिलने के बाद कान्स्टेबल के शिवाजी को बहादुरी पुरुस्कार देने की मंजूरी दे दी है। 

वाकई शिवाजी ने अपनी बहादुरी से दूसरों के सामने जो मिसाल पेश की है, उसे POZITIVE INDIA परिवार सलाम करता है। अगर आरपीएफ का हर जवान शिवाजी की तरह हो जाए तो ट्रेनों में कोई भी महिला कभी खुद को असुरक्षित महसूस नहीं करेगी।

 

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