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Must Read: बेटी के नाम एक मां का खत

mayankshukla 4 years ago
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13 मई यानि मदर्स-डे। दुनिया का सबसे खास दिन, जो कुछ दिन बाद ही आने वाला है, मगर इस मदर्स-डे से पहले मैं आप सबको एक मां का अपनी बेटी के नाम लिखा गया खुला खत पढ़ाना चाहता हूं। ये वो खत है शायद जिसकी चाहत हर बेटी को होती है,ये वही खत है जिसे पढ़ने की सबसे ज्यादा जरूरत शायद आज इसी देश को है। 

 

मेरी बेटी के लिए,

जब कोई और तुमसे टकराए तो माफी मत मांगना। ये समझकर कि तुम किसी को दर्द दे रही हो, माफी मत मांगना। तुम किसी के लिए दर्द नहीं हो। तुम इंसान हो, जिसके विचार हैं, जिसकी संवेदनाएं हैं और जो सम्मान की हक़दार है। जिस लड़के के साथ तुम बाहर नहीं जाना चाहतीं उसके साथ जाने के लिए तुम्हें वजह तलाशने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हें किसी को सफाई देने की ज़रूरत नहीं है। 

तुम किसी के सामने क्या खाती हो इसके बारे में ज़्यादा मत सोचो। अगर तुम्हें भूख लगी है, खाओ और वो खाओ जो तुम खाना चाहती हो। अगर तुम्हें पिज़्जा खाना है तो सिर्फ इसलिए सलाद मत मंगवाओ क्योंकि तुम्हारे आस-पास के बाकी लोग सलाद खा रहे हैं। तुम पिज़्ज़ा ही खाओ।

किसी दूसरे को खुश करने के लिए अपने बाल लंबे मत करो। जिस ड्रेस को तुम नहीं पहनना चाहती उसे मत पहनो। सिर्फ इसलिए घर पर मत रुको क्योंकि तुम्हारे साथ बाहर जाने वाला कोई नहीं है। अपने साथ बाहर जाओ। खुद से, खुद के लिए अनुभव लो।अपने आंसुओं को मत रोको। रोने का मतलब है, तुम कुछ ऐसा महसूस कर रही हो जिसे बाहर निकालना ज़रूरी है। यह कमज़ोरी नहीं है। यह इंसान होना है।

 इसलिए मत हंसों क्योंकि तुमसे किसी ने हंसने के लिए बोला है। अपने ही जोक्स पर हंसने से मत डरो। सिर्फ सभ्य दिखने के लिए ‘हां’ मत बोलो। ‘न’ बोलो क्योंकि ये तुम्हारी ज़िंदगी है। अपने विचारों को मत छुपाओ। बोलो और तेज़ बोलो। तुम्हें सुना जाएगा। जो तुम हो, उसके लिए शर्मिंदा मत हो। बहादुर, साहसिक और सुंदर बनो। बिना किसी शर्मिंदगी के वो बनो, जो तुम हो।

दरअसल ये लेटर अमेरिका की ब्लॉगर टोनी हैमर ने अपनी बेटी के लिए फेसबुक पर लिखा था। अपनी बेटी के लिए लिखे इस खुले खत में उन्होंने उसे समझाया कि सामाजिक दबाव में आकर उसे क्या-क्या करने की जरूरत नहीं है। टोनी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई और हजारों लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया।


भले ही ये खत अमेरिका में रहने वाली टोनी हैमर ने अपनी बेटी के लिए लिखा है लेकिन इस खत की गहराईयों को सबसे ज्यादा समझने की जरूरत हम भारतीयों को है। क्योंकि अभी सिर्फ देश बदला है, सोच नहीं। कठुआ,उन्नाव और सासाराम की घटना के बाद जिस तरह के बयान और मानसिकताएं सामने आ रही हैं,जिस तेजी से लड़कियों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं, इन हालातों में हमें लड़कियों को दबाने या नजर नीचे करके चलने की नसीहत देने की बजाए खुलकर जीने की आजादी देनी होगी। अगर नीयत सामने वाले की खराब है तो पर्दा बेटियां क्यों करें? जरा सोंचिए और अपनी सोच बदलिए तभी भारत बदलेगा।

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