LOADING

Type to search

जिंदगी में हर कुछ मुमकिन है, यकीन न हो तो ये कहानी पढ़ लीजिए

mayankshukla 4 years ago
Share

वाकई जिंदगी बड़ी विचित्र है। कभी काली है तो कभी सफेद। मेरी ये कहानी भी जिंदगी की तरह ही थोड़ी विचित्र है। जिसमें अच्छाइयों के रंग भी हैं और बुराई की छाप भी। मगर ये न तो किसी फिल्म की कहानी है और न ही किसी नॉवेल की स्टोरी। ये कहानी है असल जिंदगी में एक खलनायक के नायक बनने की। ये एक पापी के मसीहा बनने की ऐसी कहानी है जो कई और जिंदगियों का रुख और नजरिया बदलने का माद्दा रखती है।

डॉन से डाकू और फिर गरीबों के भगवान बने ऑटो टी राजा की कहानी

55 साल के टी राजा बेंगलुरू और उसके आस-पास सड़कों पर गुजर बसर करने वाले हजारों भिखारियों और बेसहारा लोगों के लिए आज जीते जागते भगवान हैं। मगर क्या आप यकीन करेंगे कि आज जरूरतमंदों की मदद को अपना धर्म मानने वाला यही शख्स कभी अपने कर्मों से शैतान हुआ करता था। चोरी,डकैती और लूटपाट उसका पेशा था। उसकी जिंदगी पूरी तरह जुर्म की गलियों में डूब सी गई थी। लेकिन एक दिन राजा की जिंदगी में ऐसा परिवर्तन आया कि वो देखते ही देखते उन सभी के लिए एक रोल माडल बन गए, जो सोंचते हैं कि जिंदगी में अब आगे बढ़ने के लिए और कुछ भी नहीं बचा है। 

हम जब भी घर से बाहर निकलते हैं तो सड़क पर भीख मांगते हुए बच्चों को देखकर कुछ पल के लिए पिघल जाते हैं और सोंचते हैं कि ये सब देश में कैसे खत्म हो। मगर ज्यादातर लोग इस दिशा में कोई काम नहीं करते सिर्फ सोचते ही रह जाते हैं लेकिन इसी धरती पर कुछ ऐसे भी फरिश्ते होते हैं जो ऐसे बेसहारा लोगों की मदद करने को अपना मजहब मान लेते हैं। एक इंसान, चोर से दूसरों की सहायता करने वाला नेकदिल आदमी कैसे बन सकता है, इसकी मिसाल हैं टी राजा।

टी राजा का जन्म एक टेलीफोन लाइनमैन के घर हुआ।वे हमेशा मां-बाप के प्यार को तरसते रहे। बहुत छोटी उम्र में ही उन्हें बुरी आदतों की लत लग गई जिसके कारण उन्होंने स्कूल से भी नाता तोड़ लिया। बुरी संगत में फंसकर राजा शराब और जुएं के भी आदि हो गए। यहां तक कि अपनी इन गंदी लतों को पूरा करने के लिए उन्होंने चोरी करना भी शुरू कर दिया। देखते ही देखते राजा अपने इलाके के डॉन बन गए और गलत कामों का भूत उनके सिर कुछ इस कदर सवार हुआ कि उन्होंने अपने घर में ही चोरी करना शुरू कर दिया और परिवार की सारी दौलत तक लुटा दी।

आखिरकार थक हारकर घरवालों ने भी उन्हें घर से बाहर निकाल दिया और वो सड़कों पर रहने को मजबूर हो गए। बस स्टैंड पर एक कचरे का डिब्बा ही उनका परमानेंट बेडरूम बन गया। दो साल तक वो बेंगलुरू की सड़कों पर भिखारियों की तरह रहे। 16 साल की उम्र में वो चेन्नई चले गए और वहां जाकर फिर से अपराध का रास्ता अख्तियार कर लिया। इसी बीच वो एक डकैती का भी हिस्सा बने जिसके बाद पुलिस ने उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया। जेल में रहकर उन्हें अहसास हुआ कि ऐसी जिंदगी का कोई मतलब नहीं है।

जेल से छूटने के बाद राजा बेंगलुरु वापस आए और अपनी फैमिली से एक और मौका देने की गुजारिश की। राजा फिर से अपनी एक नई जिंदगी शुरू करना चाहते थे। अब तक उन्हें इस बात का इल्म हो चुका था कि दूसरों की मदद करने के बाद ही जीवन का असली सुख मिलता है। 

जेल से रिहा होने के बाद राजा ने बेंगलुरु में ऑटोरिक्शा और टैक्सी चलाना शुरू किया। उन्होंने ऑटोरिक्शा यूनियन में बॉडीगार्ड के तौर पर भी काम किया। लेकिन राजा की जिंदगी में सबसे अहम मोड़ उस वक्त आया जब उन्होंने सड़क किनारे एक वृद्ध महिला को तड़पते देखा। इलाज,देखरेख और साफ-सफाई के अभाव में उस महिला के शरीर पर पड़े घाव सड़ने लगे थे। राजा से ये देखा नहीं गया, उनका दिल तड़प उठा और अचानक एक बेरहम इंसान के अंदर जज्बातों का दरिया बह उठा। ये वही पल था जिसके बाद राजा ने अपनी पूरी जिंदगी बदल डाली। राजा उस बेसहारा महिला को अपने घर ले आए। उसके सभी घावों को अपने हांथों से साफ कर दवा लगाई, उसे नए कपड़े दिए और घर में रखकर उसकी सेवा करते रहे। इस हृदय विदारक घटना के बाद राजा ने जरूरतमंदों की मदद को अपने जिंदगी का मकसद बना लिया। गरीबों की मदद के उद्देश्य से उन्होंने 1997 में  एक संगठन बनाया जिसका नाम रखा न्यू आर्क मिशन ऑफ इंडिया। राजा ने अपने इस संगठन का ऑफिस अपने घर के बाहर ही एक कमरे में बना रखा था। वो सड़क पर पड़े निराश्रितों को ऑटो से अपने घर लाते। उनके घावों को साफ कर नहलाते,साफ कपड़े पहनाते और खाना खिलाते।

शुरू में तो राजा का साथ किसी ने नहीं दिया। लेकिन कुछ महीनों बाद उनकी पत्नी ने इस नेक काम में साथ देने का फैसला लिया। धीरे-धीरे राजा के घर निराश्रितों की संख्या बढ़ने लगी और ज्यादा जगह की जरूरत महसूस होने लगी। ऐसे में एक चर्च ने उन्हें पांच हजार रुपए दान में दिए और थोड़ी सी जगह भी मुहैया कराई। यहीं से होम ऑफ होप की नींव रखी गई। इसके बाद राजा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिछले बीस सालों में होम ऑफ होप ने 11000 बेसहारा लोगों को सहारा दिया वहीं 6 हजार से ज्यादा लोगों ने यहीं से सम्मान और शांति के साथ इस दुनिया से विदाई ली। 

फिलहाल होम ऑफ होप ने 700 लोगों को आश्रय दिया हुआ है जिसमें 80 अनाथ बच्चे शामिल हैं। एक डॉक्टर, साइकेट्रिस्ट और 8 नर्सें उनकी देखभाल के लिए हर वक्त मौजूद रहती हैं। इतना ही नहीं राजा इन बच्चों को पढ़ने के लिए प्राइवेट स्कूल भी भेज रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि ये बच्चे बड़े होकर अच्छे नागरिक बनेंगे और जरूरतमंदों की मदद करेंगे।

राजा कहते हैं कि हम किसी दूसरे देश से कोई दूसरी मदर टेरेसा के आने की उम्मीद नहीं कर सकते कि वो आएं और हमारे देश के लोगों की सेवा करें। हमें उन जैसा बनना होगा और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करनी होगी।इतने असहाय और लाचार लोगों को आश्रय देने वाले राजा के पास अपना खुद का घर तक नहीं है। उन्हें भरोसा है कि ईश्वर उनके लिए स्वर्ग में एक सुंदर सा घर बनाएंगे।राजा कर्नाटक को एक ऐसा राज्य बनाना चाहते हैं जहां कोई भिखारी और बेसहारा न हो।


राजा ने इंसानियत का जो काम बीस बरस पहले शुरू किया था, वो आज भी बादस्तूर जारी है। आज भी वो उसी शिद्दत और जुनून के साथ गरीबों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की सेवा करते हैं। राजा आज हजारों लोगों के लिए किसी मसीहा और देश के करोड़ों लोगों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। राजा की कहानी जिंदगी से निराश उन लोगों के लिए घने अंधेरे में एक रोशनी की तरह है, जो एक वक्त या वाकये के बाद नए सिरे से जिंदगी जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं और अपनी आगे की जिंदगी को बेहतर बनाने की बजाए बिना और बर्बाद करते रहते हैं।

STORY BY MAYANK SHUKLA

Tags:

You Might also Like

Leave a Reply

%d bloggers like this: