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Story of India’s Youngest Entrepreneur अनुभव वाधवा

स्टार्टअप…ये नये भारत की बड़ी उम्मीद है जो देश के होनहार युवाओं के हौंसलों को उड़ने की आजादी दे रहा है. लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि 12 साल की जिस कच्ची उम्र में बच्चे अपने कैरियर के बारे में सोचना भी शुरू नहीं कर पाते,उस उम्र में कोई बच्चा अपना एक सफल स्टार्टअप शुरू कर सकता है और फिर 17 साल की उम्र में अपने नए इनोवेशन के जरिए दुनिया को चौंका कर रख देता है.

मिलिए 17 साल के उस लड़के से जिसने 71 साल पुरानी समस्या का किया समाधान

स्टार्टअप के इस दौर में आज बड़े क्या, बच्चे भी अपना नाम रोशन कर रहे हैं. अनुभव वाधवा ऐसा ही एक होनहार लड़का है.17  साल के अनुभव पाथवे वर्ल्ड स्कूल आरावली, गुड़गांव की क्लास 12वीं के छात्र हैं. अनुभव ने अपने काम की शुरूआत 2012 में ‘टेकऐप्टो’ के साथ की और इसके बाद दिसंबर 2015 में उन्होनें ‘टायरलेसली’ की नींव रखी और जनवरी 2016 में इसे लांच कर दिया. Tyrelessly टायरों से निकलने वाले प्रदूषण को दूर करने की एक अनूठी पहल की है.

स्टार्टअप के साथ पर्यावरण को बचाने की कोशिश का नाम है ‘टायरलेसली’

‘टायरलेसली’ (tyrelessly) नाम का ये स्टार्टअप पुराने टायरों को इकट्ठा करता है और सुरक्षित रूप से उनका निपटारा करता है.‘टायरलेसली’ (tyrelessly) के दो मुख्य उद्देश्य हैं ,पहला मैटेरियल रिकवरी और दूसरा एनर्जी रिकवरी. ‘टायरलेसली’ को अगर कोई पुराने टायर देना चाहता है तो वो इनकी वेबसाइट पर जाकर अपना संदेश छोड़ सकता है. जिसके बाद ये बताई गई जगह पर पहुंच कर पुराने टायरों को उठा लेते हैं. फिलहाल इनकी ये सेवा दिल्ली और एनसीआर में जारी है, जल्द ही इनकी योजना अपनी सेवा का विस्तार कर देश के 12 दूसरे प्रमुख शहरों में शुरू करने की है.

भारत की छोड़िए, आज विश्वभर में प्रदूषण का कहर जारी है. मानव की बढ़ती ज़रूरतों ने प्रदूषण को जन्म दिया. आज हर देश इसके चुंगल में फंसा हुआ है. सांसे खराब हुई जा रही हैं. बीमारियां बढ़ती जा रही हैं. सड़क पर सरपट दौड़ती गाड़ियां अच्छी तो लगती हैं, लेकिन होती कतई नहीं. उनसे निकलने वाले प्रदूषण का खामियाज़ा उस शख़्स को भी भुगतना पड़ता है जो उन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा रहा है.

कैसे आया टायरलेसली का आईडिया:

अनुभवन ने बताया  ‘एक एक दिन स्कूल से घर वापस आते वक्त उन्होनें सड़क पर पुराने टायरों को बिखरे और जलते हुए देखा,जो उन्हें अच्छा नहीं लगा क्योंकि इससे वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड बढ़ रहा था जिससे हवा प्रदूषित हो रही थी… इस घटना के बाद जब मैं घर लौटा तो सबसे पहले गूगल में सर्च किया कि पुराने टायरों को कैसे नष्ट किया जा सकता है लेकिन मुझे तब निराशा हाथ लगी जब मैंने पाया की देश में ऐसा कोई कारगर तरीका ही नहीं है…इसी समय मैंने तय किया कि इस इस क्षेत्र में कुछ काम करना ज़रूरी है.

अनुभव ने पुराने टायरों को इकट्ठा कर एक जगह पर रखने के लिए गुड़गांव में एक गोदाम लिया हुआ है. tyrelessly के पास अपनी एक वैन भी है जो अलग-अलग जगहों से टायरों को इकट्ठा करने का काम करती है. फिलहाल ‘टायरलेसली’ 5 लोगों के समूह में काम कर रही है, जल्द ही वो अपनी टीम बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं. अनुभव के मुताबिक वो जब लोगों से पुराने टायर लेते हैं तो उसके बदले कोई भुगतान तो नहीं करते लेकिन टायर लाने ले जाने की सुविधाएं मुफ्त में देते हैं. खास बात ये है कि ये 1 टायर हो या 100 टायर, ये हर जगह अपनी सेवा देते हैं.

अभी तक पुराने टायरों का इस्तेमाल चीनी उद्योग और इसी तरह के कई दूसरे उद्योगों में काफी होता रहा है, जिससे वायु प्रदुषण होता है. टायरलेसली हवा को प्रदूषित किये बिना टायरों को डिसपोज कर उनसे तेल, ग्रीस और दूसरे उत्पाद बिना प्रदूषण किये निकालती है. कंपनी में प्रारम्भिक निवेश अनुभव ने अपने पुराने वेंचर के निवेशकों से मिली राशि को लगाकर किया है, कम्पनी की आय के बारे में बात करते हुए अनुभव कहते है कि वेबसाइट में आने वाले विज्ञापन उनकी आय का मुख्य स्रोत हैं.इसके अलावा  उनकी कंपनी टायर्स को खरीदने के बाद उसे Recycle कर किसी अन्य ग्राहक को बेचकर पैसे कमाती है. अब ये लोग स्थानीय टायर वालों से संपर्क कर रहे हैं. इससे प्रदूषण कम होने के साथ-साथ इनके स्टार्ट अप की पहुंच भी बढ़ रही है.

हमारे देश में एक दिन में 6.50 लाख टायर बन रहे हैं. और हर रोज 2.75 लाख टायर वेस्ट में बदलते हैं. इनके अलावा पश्चिमी एशिया, अमेरिका और यूरोप से भी यूज्ड टायर्स हमारे यहां डम्प हो रहे है. अगर युवा उद्यमी अनुभव से सीख लेकर अपने-अपने शहर में टायर रिसायकलिंग करें तो अपने लिए पैसे भी कमा सकते है और देश को टायर जलाने से होने वाले प्रदूषण से भी बचा सकते हैं. वाकई 16 साल की उम्र में इतनी बड़ी सोच रखने वाले अनुभव के इरादे बुलंद हैं. हम दुआ करते हैं कि इन बुलंद इरादों को ज़ल्द ही शिखर मिल जाए.


 story by mayank shukla

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