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मिलिए ‘बुलेट’ से भी मजबूत इरादों वाली मथुरा की बिंदास ‘वुमनिया’ से

mayankshukla 4 years ago
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ये कहानी अपने बिंदासपन के बूते देश की आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाने वाली एक BRAVE & BOLD मैनेजमेंट स्टूडेंट की है, जो घर की चार दीवारी में कैद होकर चौका-चूल्हा करने और छोटी सी छोटी बात के लिए भी पुरुषों पर निर्भर रहने वाली महिलाओं की सदियों पुरानी इमेज को तोड़कर उन्हें आज की आत्मनिर्भर और स्मार्ट ‘वुमनिया’ बनाने का मुश्किल काम भी बखूबी कर रही है।


महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली पावनी खंडेलवाल की कहानी

अभी तक कान्हा की रासलीला के लिए मशहूर मथुरा की पावन नगरी की पहचान की वजह अब और भी हैं और ये वही पावनी खंडेलवाल हैं जो नए वीजन और फौलादी इरादों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना मथुरा को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला रही हैं.ये पावनी के पहल का ही नतीजा है कि यहां की महिलाएं घर की दहलीज से बाहर निकलकर अब शहर की सड़कों पर फर्राटे से गाड़ियां दौड़ाते नजर आ रही हैं. अब छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें किसी के सहारे की जरूरत नहीं है.

आत्मनिर्भर स्कूटर ड्राइविंग स्कूल फॉर वूमेन,मथुरा की रहने वाली पावनी खंडेलवाल की एक पहल है. जिसका मकसद छोटे शहरों-नगरों और कस्बों की महिलाओं को सशक्त और सक्षम बनाना है ताकि अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए उन्हें किसी और का मुंह ना देखना पड़े.

मेट्रो सिटी की बात करें या सेकंड क्लास शहरों की ट्रांसपोर्ट के लिए महिलाओं को या तो परिवार के किसी सदस्य पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर ऑटो या बस के धक्के खाने पड़ते हैं।जहां कई बार उनके साथ छेड़छाड़ की घटना भी सामने आती रहती है। घर में गाड़ी होने के बावजूद वो चला नहीं पातीं क्योंकि उनके प्रशिक्षण के लिए अलग से कहीं कोई व्यवस्था या सुविधा ही नहीं है।

दरअसल पुणे में मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान छुट्टियों में पावनी अपने घर मथुरा आई थीं.जहां उन्हें पता चला कि उनकी मां स्कूटी चलाना सीखना चाहती हैं.लेकिन काफी मशक्कत के बाद भी कोई महिला ट्रेनर नहीं मिली,जो उन्हें गाड़ी चलाना सिखा सके.लिहाजा मां को हो रही परेशानियों को देखते हुए पावनी ने खुद उन्हें ड्राइविंग सिखाने का फैसला लिया.इस दौरान पावनी को महसूस हुआ कि देश में ना जाने ऐसी कितनी महिलाएं होंगी जो ड्राइविंग सीखना चाहती हैं लेकिन बिना महिला प्रशिक्षक के उनका सपना पूरा नहीं हो पा रहा.बस यहीं से शुरू होता है आत्मनिर्भर का सफर.

अपनी मां को आत्मनिर्भर बनाने के बाद देश की बाकी महिलाओं को स्वाबलम्बी बनाने के लिए पावनी ने वाकायदा एक ड्राइविंग स्कूल की स्थापना की।

मथुरा से वापस पुणे जाने के बाद पावनी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया.इसके लिए गैर सरकारी संस्था ‘आत्मनिर्भर’ बनाई और लगभग 150 से ज्यादा महिलाओं को स्कूटीऔर बाइक चलाने की सफल ट्रेनिंग दी.2017 में ग्रेजुएशन खत्म करने के बाद पावनी वापस मथुरा आ गईं और ‘आत्मनिर्भर ड्राइविंग स्कूल फॉर वूमेन’ की नींव रखी.जहां बहुत ही कम फीस पर महिलाओं को गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है.इतना ही नहीं ट्रेनिंग के बाद आत्मनिर्भर ड्राइविंग स्कूल से महिलाओं को एक सर्टिफिकेट दिया जाता है साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में भी जरूरतमंदों की मदद की जाती है.

पावनी के इरादे मजबूत थे और उन्होंने बहुत जल्द ही महिला ट्रेनर की एक मजबूत टीम भी बना ली.ये 23 साल की पावनी का जुनून ही था जो उन्होंने सात महीनों के अंदर ही मथुरा के साथ-साथ भरतपुर,आगरा और जयपुर में भी अपनी ब्रांच स्थापित कर दी. आत्मनिर्भर में न सिर्फ ट्रेनर बल्कि कंपनी की सभी कर्मचारी महिलाएं हैं. आत्मनिर्भर न सिर्फ महिलाओं को स्कूटी चलाना सिखाकर आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार प्रदान करके उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है. खास बात यह है कि महिला ट्रेनर स्टूडेंट को घर से पिक करती है और घर पर ही ड्राप करती हैं. ये देशभर में महिलाओं के लिए अपनी तरह का पहला दो पहिया वाहन ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल है.

पावनी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही बाइक और कार चलाने का शौक रहा है.बचपन में ही पिता ने हाथों में स्कूटी थमा दी जिसके बाद उनका ये शौक, जुनून में बदल गया. पुणे में पढ़ाई के दौरान भी पावनी अपने पिता द्वारा गिफ्ट में दी गई बुलेट लेकर कॉलेज जाती थीं और लोग उन्हें हैरान होकर देखते थे.अब पावनी का सपना है कि वो देश के हर छोटे-बड़े शहर में आत्मनिर्भर को खोलकर महिलाओं को खुले आसमान में जीने की आजादी दें।

दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो अपने पैशन को प्रोफेशन बनाने का रिस्क उठाते हैं। बुलेट की सवारी की शौकीन पावनी उन्हीं में से एक हैं जिन्होंने अपने बुलेट से मजबूत इरादों के दम पर न सिर्फ कामयाबी हासिल की बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई। Pozitive India  पावनी और आत्मनिर्भर की पूरी टीम के साहस, सोच और जज्बे को सलाम करता है साथ ही उनके हर सफर की कामयाबी की कामना भी करता है।

 story by sudhanshu shekhar mishra

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