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हां…REAL LIFE में भी SUPER HERO होते हैं

mayankshukla 4 years ago
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अभी तक मेरा मानना था कि खतरों से खेलते हुए खुद की जान की बाजी लगाकर दूसरों की जिंदगी की हिफाजत करने वाले सुपरमैन जैसे सुपर हीरो सिर्फ सिनेमा के काल्पनिक संसार में ही होते हैं,आज की स्वार्थी दुनिया में भला कहां कोई किसी दूसरे की जिंदगी बचाने या उसकी सुरक्षा के लिए खुद को मुसीबत में डालता है.शायद इस बार मैं गलत था या फिर यूं कहें कि आज की चकाचौंध भरी जिंदगी में हमारी डरी-सहमी नजरें कई बार समाज के उन असल नायकों को तलाशकर आगे लाने का साहस ही नहीं जुटा पातीं,जो बड़ी खामोशी के साथ किसी फरिश्ते की तरह आते हैं और तूफानों से लड़ते हुए दूसरों को नया जीवन दे जाते हैं.आज हम आपको REAL LIFE के एक ऐसे ही सुपरहीरो से रूबरू कराने जा रहे हैं जिसकी बहादुरी के आगे सिनेमा के सुपरमैन का स्टंट भी फीका पड़ जाता है और उसकी जांबाजी के किस्सों के आगे बॉलीवुड के क्रिश की कहानी भी कमतर लगने लगती है.  

मिलिए REAL LIFE के सुपरहीरो से,जिसने खुद की जिंदगी दांव पर लगा बचाई 400 बच्चों की जान

हेड कांस्टेबल अभिषेक पटेल…जी हां असल मायने में मध्यप्रदेश के REAL सुपरमैन का यही नाम है और खाकी वर्दी में साधारण सा नजर आने वाला ये वही असाधारण शख्स है जिसने 400 मासूमों की जान बचाने के खातिर मौत से भी रेस लगा ली…यकीन मानिए real life में अभिषेक ने बहादुरी का जो कारनामा कर दिखाया है उसे reel life के एक्शन हीरो भी शायद नहीं कर पाते.ये तस्वीर आज भी अभिषेक के साहस और बहादुरी की जीती जागती सबूत है.गवाह है कि किस कदर उसने अपने जान की परवाह किए बिना 400 बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए मौत से जंग लड़ी थी.घटना मध्यप्रदेश के सागर जिले के चितौरा गांव की थी.जहां हर रोज की तरह सैकड़ों बच्चे हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने पहुंचे थे,तभी वहां तोप का गोला मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया.उस वक्त स्कूल में चार सौ बच्चे मौजूद थे और सभी सामने पड़े 10 किलो के बम को देखकर काफी घबराए हुए थे.दोपहर करीब 12.50 बजे किसी ने डॉयल 100 पर फोन करके सूचना दी कि स्कूल के पास तोप का गर्म गोला पड़ा है.

सुरखी थाने की डायल 100 को इस कॉल को चेक करने को कहा गया.उस वक्त डायल 100 बेरखेड़ी गांव के पास थी जहां से गांव करीब 8 किलोमीटर दूर था.फिर भी डायल 100 की टीम दोपहर 1.10 बजे तक चितौरा गांव पहुंच गई.गाड़ी में हवलदार अभिषेक पटेल अपने दो साथियों के साथ मौजूद थे

सूचना मिलते ही हेड कांस्टेबल अभिषेक पटेल अपनी टीम के साथ स्कूल पहुंचे तो बच्चे और स्कूल स्टाफ डरा सहमा एक तरफ खड़ा था.तब तक अभिषेक भी भांप चुके थे कि तोप का तपा हुआ यह गोला काफी खतरनाक हो सकता है और भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा सकता है.सबसे बड़ी समस्या समय की थी क्योंकि इस गोले को बम स्क्वायड की टीम ही डिफ्यूज कर सकती थी मगर उसे मौके पर पहुंचने में काफी समय लग सकता था.लिहाजा एक-एक सेकंड वहां मौजूद लोगों के माथे पर शिकन बढ़ा रहा था. फैसला लेने के लिए सोचने तक का वक्त नहीं बचा था.क्या किया जाए क्या ना किया जाए।

 

                             तोप का गोला लेकर भागते हुए हेड कांस्टेबल अभिषेक पटेल

आखिरकार अभिषेक ने अपने बच्चों और परिवारवालों की चिंता किए बिना 400 मासूमों की जिंदगी को महफूज रखने के लिए खुद को खतरे में डालने का साहसिक फैसला लिया और अपनी जान की परवाह किए बिना उसने तकरीबन 10 किलो वजन के तोप के गोले को अपने कंधे पर लादकर दौड़ लगा दी…जिसने भी ये नजारा देखा वो कुछ पल के लिए सहम गया .अभिषेक के साहस ने  सभी  को स्तब्ध कर दिया.अचानक डरे सहमे लोगों के चेहरों पर फिर एक उम्मीद  सी जाग उठी,आंखों से देखते हुए भी उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि अब तक उनके सामने काल बनकर खड़ी मौत को भी कांस्टेबल अभिषेक ने अपनी हिम्मत से मात दे दी.एकाएक स्कूल का पूरा  माहौल किसी फिल्म के दिलचस्प सीन में तब्दील हो गया और अभिषेक उस फिल्म  में फरिश्ता बनकर उभरे.

सभी खतरों से अनजान अभिषेक दस किलो वजन वाले तोप के गोले को कंधे में लेकर लगातार मीलों दौड़ते रहे.उन्होंने ठान रखी थी कि इस गोले को वो स्कूल और आसपास के रिहायशी इलाके से दूर किसी जंगल में ही फेंकेंगे ताकि विस्फोट होने पर किसी को नुकसान न हो.

अब तक 400 बच्चों के सिर पर मंडरा रहा खतरा तो टल गया था लेकिन अभिषेक और मौत के बीच रेस अब भी जारी थी.अभिषेक हार मानने को तैयार नहीं थे.उनमें जीतने की जिद्द सवार थी.वो मौत को मात देना चाहते थे.

लगभग दो किलोमीटर की लंबी दौड़ के बाद अभिषेक को एक जंगल नजर आया.जहां उन्होंने तोप के उस गोले को फेंक दिया.हालांकि गोला फटा नहीं और अभिषेक भी पूरी तरह सुरक्षित रहे.

“Pozitive India के संवाददाता सुधांशू शेखर मिश्रा से बात करते हुए अभिषेक ने बताया कि उस वक्त मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी था कि मैं उस बम को बच्चों से दूर ले जाऊं ताकि उन्हें कोई नुकसान न हो”

“अभिषेक के मुताबिक अगर तोप का वो गोला फट जाता तो कम से कम 500 मीटर तक तबाही मचाता,उन्हें इसी बात का डर था इसलिए बम को कंधे में रखकर भीड़ से दूर ले गए.”

“32 साल के अभिषेक का कहना है कि उन्होंने वही किया जो इस तरह के हालात में एक पुलिसवाले को करना चाहिए,ये उनका फर्ज था,जिसकी कसम उन्होंने पुलिस की नौकरी ज्वाइन करते वक्त खाई थी ”

दो बच्चों के पिता हेड कांस्टेबल अभिषेक पटेल पर आज न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और प्रदेश को गर्व है. अभिषेक असल मायने में सागर के सुपरहीरो हैं.बुंदेलखंड का हर एक कंकड़ यहां आने वालों को उनकी बहादुरी का किस्सा बयां करता है.सीएम शिवराज ने किया सम्मान

अपनी जान पर खेलकर करीब 400 बच्चों की जान बचाने वाले इस बहादुरी भरे काम के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 50 हज़ार रुपये का इनाम देकर सागर जिले के हेड कांस्टेबल अभिषेक पटेल का सम्मान किया.वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों पुरस्कार पाकर अभिषेक बहुत खुश हैं और ताउम्र अपना फर्ज इसी तरह निभाने का वादा करते हैं.

बेशक हमारा इतिहास वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई,महराणा प्रताप और शिवाजी जैसे शूरवीरों की बहादुरी के किस्सों से भरा पड़ा है.लेकिन इतिहास के अलावा वर्तमान में भी हमारे बीच कई ऐसे असल नायक हैं जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है.बस जरूरत है उन्हें आगे लाने की,उनका हौंसला बढ़ाने की.

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