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स्टार्टअप का कमाल,अब मोबाइल से हो सकेगा मतदान

mayankshukla 3 years ago
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‘राइट टू वोट’ एप के जरिए मोबाइल से मतदान मुमकिन

आईआईएम इंदौर के एलुमनी नीरज गुटगुटिया के स्टार्टअप ‘राइट टू वोट’ एप को नेस्कॉम और फेसबुक के ‘कोड फॉर नेक्सट बिलियन’ कार्यक्रम के सेकंड एडिशन के लिए चुना गया है. बैंगलुरू में हाल ही में घोषित परिणामों में देशभर के दस स्टार्टअप्स को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया. ‘राइट टू वोट’ एप के जरिए मोबाइल से किसी भी चुनाव के लिए वोटिंग की जा सकती है.

भारत में मोबाइल इंटरनेट एप्लीकेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 6 महीने के इस कार्यक्रम में इन स्टार्टअप्स को तकनीकी और आर्थिक रूप से मदद की जाएगी, ताकि ये नए इंटरनेट और मोबाइल यूजर्स तैयार कर सकें. 246 स्टार्टअप ने इसके लिए प्रयास किया था. विभिन्न बिजनेस और तकनीकी पैरामीटर्स पर खरा उतरने के बाद 20 स्टार्टअप को शार्टलिस्ट किया गया, जिन्हें पांच सदस्यों की जूरी के सामने खुद को रिप्रजेंट करने का मौका मिला. आखिर में 10 का चयन इस कार्यक्रम के लिए किया गया. मुंबई में कार्यरत नीरज 2005 बैच के आईआईएम इंदौर के पासआउट हैं,जिन्होंने राइट टू वोट एप तैयार की है.

एप से ऑनलाइन वोटिंग

नीरज के मुताबिक कई लोग खासतौर पर सैनिक, घरों से दूर रह रहे लोग, एनआरआई या स्टूडेंट्स, पोलिंग बूथ पर जाकर वोटिंग नहीं कर पाते हैं, लेकिन अगर वो घर बैठे ही सिर्फ अपने मोबाइल की स्क्रीन को टच करके वोटिंग कर सकेंगे तो जहां एक तरफ वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा वहीं चुनावों में निष्पक्षता भी सुनिश्चित की जा सकेगी.इसी विचार को ध्यान में रखकर उन्होंने 2015 में यह स्टार्टअप शुरू किया था. भारत में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस एप का उपयोग करने के लिए नीरज ने मुख्य चुनाव आयुक्त को इस एप का डेमो दिया है, जिस पर विचार किया जा रहा है. मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और तमिलनाडु सरकारों से भी एप से वोटिंग को लेकर बात हुई है. महाराष्ट्र सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की सहमति भी प्रदान की है.

आईआईएम में इसी एप से हुए थे चुनाव

पिछले साल आईआईएम इंदौर के इलेक्शन इसी एप के जरिए कराए गए थे. मुंबई में बैठी हमारी टीम ने बिना पेपर्स का उपयोग किए सिर्फ मोबाइल से सारी प्रक्रिया पूरी कराई. इस दौरान एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई. हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेजों में इस एप का इस्तेमाल किया जा रहा है. नीरज अगले चुनावों में इस एप के इस्तेमाल को लेकर काफी आशान्वित हैं. इस एप को मार्केट सर्वे, ओपिनियन पोल के लिए भी उपयोग किया जा सकता है. इससे मतदाताओं का समय और धन बचने के साथ ही चुनावों में 100 फीसदी निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकती है. इस एप का बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन मतदाता के आधार नंबर से किया जाता है.

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