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छत्तीसगढ़ के छोटे शहर के छात्रों की बड़ी खोज आपके बेहद काम की है

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छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग छात्रों का कमाल, खुद का आशियाना बनाना हुआ आसान

हर इंसान का सपना होता है कि उसका खुद का एक घर हो.लेकिन आज की बढ़ती महंगाई में सपनों के इस आशियाने को बनाने के लिए कई दफा हमारे जीवनभर की कमाई भी कम पड़ जाती  है. निर्माण की लगातार बढ़ती लागत के कारण चार दीवारों से बने कमरे को बनाने में एक आदमी का पसीना छूट जाता है.मगर छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग के 4 छात्रों की नई खोज हमारी इस मुश्किल को काफी हद तक आसान कर सकती है,बस जरूरत है तो उन युवाओं के गजब के आईडिया को समझने और अपनाने की. 

खुद का घर बनाने से पहले इन होनहार इंजीनियर्स की नई खोज के बारे में आपको जरूर पढ़ना चाहिए

मकान बनाने के लिए रेत और सीमेंट की जगह अब धान की भूसी का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा.जी हां, धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग के छात्रों ने यह नायाब और अनोखा कारनामा कर दिखाया है. इससे कंक्रीट में पड़ने वाली रेत और सीमेंट की मात्रा घटाई जा सकेगी लेकिन निर्माण में मजबूती उतनी ही दमदार रहेगी और लागत भी 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगी.

दरअसल आइटी कॉलेज कोरबा में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे पांच स्टूडेंट्स ने धान की भूसी और संयंत्रों की भट्ठी से निकलने वाली राख को गारे के रूप में इस्तेमाल कर कंक्रीट का नया फॉर्मूला ईजाद किया है.जिससे कम लागत में पहले जैसी दमदार मजबूती मिलेगी.धान की भूसी से अब तक बिजली, तेल, लकड़ी, बोर्ड, ईंट और सिलिका आदि बनाए जा रहे हैं. यह शोध एक इसमें एक नया विकल्प जोड़ रहा है.

निर्माण में कारगर है थ्योरी

आईटी कॉलेज कोरबा के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर विजय कुमार ने बताया कि छात्रों द्वारा तैयार की गई कंक्रीट पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में उतनी ही मजबूत है. इस विधि में रेत और सीमेंट की मात्रा कम करके इनकी जगह धान की भूसी और संयंत्रों से निकलने वाली राख का इस्तेमाल किया जाता है.इसके लिए गारे में भूसी और राख को बराबर मात्रा में मिलाया जाता है. दोनों का हिस्सा 10-10 प्रतिशत रखा जाता है.साथ ही ईंट के टुकड़े भी इसमें मिलाए जाते हैं. इससे गारे में पड़ने वाली रेत और सीमेंट की मात्रा 10-10 फीसदी कम हो जाती है. प्रो. केडिया का दावा है कि इस विधि के इस्तेमाल से निर्माण की लागत परंपरागत विधि के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगी.छात्रों ने फिलहाल इस क्रांकीट का इस्तेमाल कर ऐसे ढांचे बनाए हैं, जिन्हें जोड़कर दीवार, पार्टीशन आदि बनाए जा सकते हैं.

बड़े काम की भूसी

बिजली: धान की भूसी से भाप संयत्र चलाये जाते हैं. जिनसे टरबाईन को चला कर बिजली प्राप्त की जाती है. छोटे राइस मिल धान की भूसी से 100 हार्स पावर बिजली तैयार कर सकते हैं.

सिलिका: धान की भूसी से बिजली बनाने पर इस प्रक्रिया में निकलने वाली राख से सिलिका भी तैयार की जा रही है. जिसका इस्तेमाल टायर बनाने में किया जाता है.

लकड़ी: धान की भूसी और देवदार के काँटों से लकड़ी बनाने की तकनीक विकसित की गई है. भूसी को लकड़ी में बदलने के लिए पहले से बने खाँचे में उच्च दाब की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस तकनीक से बनी लकड़ी का इस्तेमाल आम लकड़ी की तरह किया जा सकता है.

ईंट: धान की भूसी का उपयोग ईंट बनाने में बहुतायत में होता है.

बोर्ड : भूसी से वाटरप्रूफ तख्ता (बोर्ड) बनाया जाता है.

तेल: धान की भूसी-कनकी से तेल भी बनाया जाता है.

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