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किन्नरों की जिंदगी बदलने वाले एक शख्स की अनसुनी कहानी

mayankshukla 4 years ago
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ये कहानी एक ऐसे शख्स की है जिसने समाज में अपने वजूद को लेकर आशंकित एक तबके यानि किन्नरों की पहचान बदलने की पहल की,मेरे नजरिए में ये कहानी उस असल नायक की है जिसने समाज में सदियों से खींची गई उस दकियानुसी रेखा को मिटाने का साहस दिखाया जो हमें, किन्नरों और इंसानों के बीच हमेशा से बाटती रही है .ये कहानी अपने रेस्टोरेंट में किन्नरों को नौकरी देने वाले मुंबई के उस निमेश शेट्टी की है जिसकी सोच को आज हम सभी को सलाम करना चाहिए.

ट्रांसजेंडर्स की स्थिति देश में किसी से छिपी नहीं है.भीख या नेग मागने के अलावा किसी भी काम करने पर उनका सामाजिक तौर पर बहिष्कार कर दिया जाता है.हिंदुस्तान में किन्नरों का काम शुभ मौकों पर घरों पर जाकर बधाई देने या फिर ट्रेन,बसों और दुकानों पर लोगों से पैसे मांगकर गुजारा करने तक ही माना जाता है.लेकिन हमारे बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इनका दर्द समझते हैं और इन्हें सम्मान पूर्वक जीने की राह दिखाते हैं.लिहाजा वक्त के साथ-साथ अब किन्नरों की पहचान भी बदल रही है और उनकी जिंदगी में आमूलचूल बदलाव लाने का बीड़ा उठाया है एक नौजवान ने.जी हां हम बात कर रहे हैं नवी मुंबई के एक रेस्टोरेंट की, जो किन्नरों की जिंदगी में अलग तरह से बदलाव ला रहा है. इसके पीछे सोच है कि उन्हें भी समाज की मेनस्ट्रीम में शामिल किया जा सके.लगभग दो हफ्ते पहले खुले ‘थर्ड आई’ नाम के इस कैफे में फिलहाल 6 किन्नरों को नौकरी दी गई है.

इस कैफे में किन्नर ही कस्टमर्स को खाना परोसते हैं. किचन संभालने की जिम्मेदारी भी इन पर है. 

कैफै मालिक निमेश शेट्टी के मुताबिक वो आर्किटेक की पढाई के दौरान एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे,तभी उनकी नजर किन्नरों की बदहाली पर पड़ी. इसके बाद उन्होंने किन्नरों के लिए काम करने वाली कई गैर सरकारी संस्थाओं से सम्पर्क किया और तय किया कि किन्नरों को लेकर लोगों के मन में बनी धारणा बदलना बेहद जरुरी है.लेकिन यह तभी संभव होगा जब उन्हें बेहतर रोजगार मिलेगा.

निमेश के मुताबिक उनके पिताजी पहले से ही होटल इंडस्ट्री में थे, इसलिए कैफै खोलने में उन्हें ज्यादा कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ा.निमेश के कैफे में कर्मचारियों द्वारा केवल हिंदी भाषा बोली जाती है.अभिवादन के लिए गुडमार्निंग-गुड इवनिंग की बजाय नमस्कार का प्रयोग होता है.

निमेश शेट्‌टी बताते हैं कि जिन किन्नरों को हमने जॉब पर रखा है, वो ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है. उन्होंने कहा कि हमने किन्नरों को जॉब देकर एक पॉजीटिव पहल की है.ताकि उन्हें समाज से जोड़ा जा सके.आज की युवा पीढ़ी काफी मैच्योर है.वो यह नहीं देखती है कि किसे काम पर रखा गया है.अब तक कैफे में आने वाले लोगों से हमें अच्छा रिस्पांस मिला है. शेट्‌टी इस बात से खुश हैं कि कैफे में आनेवाले लोगों ने उनकी इस पहल को सराहा है.

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