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दुनिया को मार्केटिंग के गुर सिखाने वाले शख्स की कहानी

mayankshukla 4 years ago
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कहते हैं दुनिया में हर चीज बिकती है,सिर्फ बेंचने का हुनर होना चाहिए.अगर आप में मार्केटिंग की कला है तो आप पत्थर को भी सोना के भाव बेच सकते हैं.आज pozitive india.com आपको एक ऐसे ही मास्टर माइंड इंसान की असल और अनसुनी कहानी सुनाने जा रहा है जिसने अपनी मार्केटिंग की कला से पूरी दुनिया को चौंका कर रख दिया और साबित कर दिया कि इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है. 

दिमाग दौड़ाया और जमीन पर पड़े पत्थर से खड़ा किया कारोबार

कई दफा कमाल के आइडिया भी शुरू होने से पहले इसलिए फुस्स हो जाते हैं क्योंकि लोग उनका मजाक बना देते हैं.लेकिन आज हम आपको एक ऐसे हुनरबाज की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसे अपने बिजनेस का आईडिया एक मजाक से मिला,और तो और उसका जितना ज्यादा मजाक बना वो उतना ही सक्सेस होता चला गया.ये है बिजनेस वर्ल्ड की सबसे अनोखी केस स्टडी जिसने दुनिया को कामयाब होने का नया और कारगर फार्मूला दिया.

हम बात कर रहे हैं पेट रॉक के फाउंडर गैरी डेल की.दुनियाभर की मीडिया और मैनेजमेंट कोर्स का हिस्सा बन चुके पेट रॉक को टाइम मैगजीन ने दुनिया के 10 क्रेजी बिजनेस आईडिया में शामिल किया है.दरअसल पेट रॉक नदी के किनारे मिलने वाला एक आम पत्थर था,जिसे गैरी डेल ने एक पालतू जानवर की तरह पेश किया.इस पत्थर के साथ ही गैरी ने कुछ ऐसी चीजें भी दीं जिसे लेकर लोगों ने इसके लिए 4 गुना कीमत चुकाई.पेट रॉक के लांच होने के बाद सिर्फ 6 महीने में ही गैरी ने 60 लाख डॉलर कमा लिए जो आज के हिसाब से 150 करोड़ रुपए के बराबर है.

एक मजाक से मिले बिजनेस आईडिया से खड़ी की करोड़ों की कंपनी 

बात साल 1975 की है जब एडवरटाइजिंग एग्जीक्यूटिव गैरी डेल एक दिन देर शाम अपने दोस्त के साथ वॉक पर निकले थे.इस दौरान उनका दोस्त बार-बार अपने कुत्ते की शिकायत कर रहा था.अचानक गैरी ने मजाक किया कि उनके पास जो कुत्ता है वो बिल्कुल पत्थर की तरह है,न उसे खाने की जरूरत है और न ही वो घर गंदा करता है.अगले आधे घंटे तक दोनों यार इसी बारे में मजाक करते रहे कि पत्थर से बना पेट कितना फायदेमंद है.अगले दिन भले ही गैरी का दोस्त ये सब कुछ भूल गया लेकिन गैरी को सब याद रहा.उसने मजाक-मजाक में की गई सारी बातें नोट की और हथेली से भी छोटे पत्थर को लेकर पेट रॉक लॉंच कर दिया.

6 महीने में 15 लाख पेट रॉक किए सेल

गैरी ने ये प्रोडक्ट 1975 में क्रिसमस के दिन लॉन्च किया था.प्रोडक्ट की सेल सिर्फ 6 महीने ही हो सकी, लेकिन इस दौरान 4 डॉलर प्रति पेट की दर से 15 लाख पेट रॉक बिक गए.भले ही पेट रॉक की बिक्री महज 6 महीने ही हुई लेकिन कम समय में ही इसकी सफलता ने गैरी की इतनी कमाई करा दी कि उसने इस पैसे कई और दूसरे बिजनेस खड़े कर दिए.गैरी ने इस रॉक की कमाई से खुद का एड का बिजनेस स्टार्ट कर दिया.इसके अलावा गैरी ने रेस्टोरेंट के क्षेत्र में भी हाथ आजमाए.

मजाक को मिला प्रोडक्ट की सफलता का श्रेय

पेट रॉक की सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ डेल की मार्केटिंग स्किल और प्रेजेंटेशन का रहा.टाइम में छपे एक ऑर्टिकल के मुताबिक पेट रॉक सिर्फ एक फीसदी प्रोडक्ट और 99 फीसदी मार्केटिंग थी.डेल ने इस प्रोडक्ट के साथ घर के शेप की पैकेजिंग भी दी.इस पैकेज(बॉक्स)में हवा आने-जाने के लिए वाकायदा खिड़कियां बनाई गई.इसके साथ ही एक छोटा सा घोसला और गाइड बुक भी ग्राहकों को दी गई.

टाइम के मुताबिक वास्तव में ज्यादातर लोगों ने 32 पेज की इस गाइड के लिए ही पैसे चुकाए थे.क्योंकि इसमें लिखी बातें लोगों को काफी पसंद आई.इसमें मजाकिया अंदाज में बताया गया था कि अपने पेट रॉक को खाना कैसे लाएं,उसे इशारे कैसे सिखाएं.सभी लोग जानते थे कि पत्थर से ऐसी उम्मीद करना बेकार है,इसलिए उन्हें ये इमेजिनेशन काफी मजाकिया और यूनिक लगी.मार्केटिंग की वजह से ये प्रोडक्ट एक टॉय,एक कलेक्टिबल और मजाक बन गया था.ग्राहकों को इसमें जो खूबी नजर आई,उसने उसी हिसाब से इसे खरीदा.

प्रोडक्ट से ज्यादा पैकेजिंग की कीमत                 

इस बिजनेस कान्सेप्ट की एक और बात ने एक्सपर्ट को हैरान कर दिया.ये एक ऐसा बिजनेस आईडिया था जिसमें प्रोडक्ट को पैक करने की कास्टिंग उस प्रोडक्ट से ही महंगी थी.क्योंकि रॉक  मुफ्त थे, वहीं गाइड का कटेंट गैरी ने खुद तैयार किया था.गत्ते से बनी पैकेजिंग का काम उसे दूसरी कंपनी को देना पड़ा.इन तमाम खर्चों को जोड़कर पेट रॉक की कीमत 1 डॉलर के करीब हुई.  जिसमें सबसे ज्यादा खर्च गत्तों पर किया गया.

कानूनी कार्रवाई की धमकी की वजह से नहीं फैलाया बिजनेस

पेट रॉक की मदद से करोड़ों कमाने की सूचना के बाद कई लोगों ने गैरी को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी.इन लोगों ने गैरी पर मजाक कर पैसे कमाने का आरोप लगाया.हालांकि किसी ने भी केस दर्ज नहीं कराया क्योंकि गैरी ने पेट रॉक को लेकर कुछ भी नहीं छिपाया था,उसने रॉक को एक पेट की शक्ल देकर बेचा था.बस लोगों को ये मानने की सलाह दी थी कि इसे अपने पेट की तरह संभाल कर रखें.लिहाजा इसकी बिक्री एक कलेक्टिव और खिलौने के तौर पर दर्ज हुई.

बाद में विवाद बढ़ने की आशंका,प्रोडक्ट की सेल अपने हाई लेवल पर पहुंचना और गैरी के नए बिजनेस पर ज्यादा फोकस की वजह से पेट रॉक की ब्रिकी को ज्यादा बढ़ावा नहीं दिया गया.हालांकि साल 2012 में पेट रॉक को फिर से लॉन्च किया गया और इसकी कीमत 20 डॉलर रखी गई.साल 2015 में गैरी की मौत हो गई.फिलहाल पेट रॉक ट्रेडमार्क रोजबड इंटरटेनमेंट के पास है.

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